सिर्फ धार्मिक परंपरा नहीं, पूर्वजों को याद करने का माध्यम है पितृपक्ष
त्रिभुवन नाथ शर्मा की रिपोर्ट
प्रयागराज। आज से पितरों को घर बुलाएंगे श्रद्धालु 15 दिन करेंगे पूजा और सेवा। आज शनिवार से पितृ पक्ष की शुरुआत हो रही है। Prayagraj में संगम पर इसका अलग महत्व है। देश भर से लोग पितृ पक्ष में पितरों के तर्पण और पिंडदान के लिए संगम पहुंचते हैं। इसको लेकर संगम पर अलग-अलग तैयारी और भावनाएं देखने को मिल रही है। कोई सुबह संगम पहुंचकर तर्पण करने की तैयारी में है तो कोई अपने परिवार के साथ पिंडदान की योजना बना रहा है।
दूसरी ओर संगम के पुरोहितों की भी आज से दिनचर्या में बदलाव और तैयारी देखने को मिली। वही कई परिवारों ने बताया कि पितृपक्ष उनके लिए सिर्फ एक धार्मिक परंपरा नहीं बल्कि अपने बुजुर्गों और पूर्वजों को याद करने का मौका है।
26 सितंबर से पितृपक्ष की शुरुआत हो रही है और 10 अक्टूबर तक श्राद्ध कर्म चलेंगे संगम पर आने वाले श्रद्धालुओं को देखते हुए घाटों की सफाई रोशनी पेयजल और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर प्रशासन भी तैयारियां तेज की है।
पितृ पक्ष में परहेज जरूरी
पितृ पक्ष में कई परिवारों के लोग सादा जीवन शैली अपनाते हैं दाढ़ी बाल कटवाने, नए कपड़े खरीदने या पहनने, मांगलिक कार्यक्रम और दिखावे से दूरी रखने की परंपरा है। खान-पान में भी सात्विक भोजन को प्राथमिकता दी जाती है प्याज, लहसुन, मांसाहार और नशे से परहेज रखने की परंपरा कई परिवारों में आज भी है।










