त्रिभुवन नाथ शर्मा की रिपोर्ट
प्रयागराज। ‘बरसाने की मोर कुटी पे मोर बन आयो रसिया’ और ‘मुरली वाले गीत पर झूमे श्रोता। उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र, संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार की ओर से आयोजित दीपावली शिल्प मेले के दूसरे दिन सांस्कृतिक केंद्र परिसर स्थित शिल्प हाट के मुक्ताकाशी मंच पर लोकगीतों, भजनों, गजलों और शास्त्रीय नृत्य की प्रस्तुतियों ने सांस्कृतिक संध्या को यादगार बना दिया। कलाकारों की मनमोहक प्रस्तुतियों पर दर्शकों ने तालियों के साथ उत्साहवर्धन किया। मेले में एक ओर मंच से लोकसंस्कृति के रंग बिखरे, वहीं दूसरी ओर विभिन्न राज्यों से आए शिल्पकारों के हस्तनिर्मित उत्पाद भी लोगों के आकर्षण का केंद्र बने रहे।
कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि प्रो. देवेश रंजन त्रिपाठी, उत्तर प्रदेश राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय, केंद्र निदेशक सुदेश शर्मा, उपनिदेशक डॉ. मुकेश उपाध्याय एवं सलाहकार कल्पना सहाय ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया।
सांस्कृतिक संध्या की शुरुआत प्रयागराज की नवोदित कलाकार दिशा शर्मा ने भक्ति प्रस्तुतियों से की। उन्होंने ‘बसो मोरे नैनन में नंदलाल’, ‘जय दुर्गे दुर्गति परिहारिणी’, ‘सखी, सियावर की रंगीली झाँकी’ और ‘आई दिवाली, दीप जला लो, दूर करो अँधियारा’ की प्रस्तुति देकर श्रोताओं का मन मोह लिया।

इसके बाद वैशाली नाथ के नेतृत्व में शास्त्रीय नृत्य की प्रस्तुति हुई। समूह में कृति सिंह, दीप्ति चौधरी, महक कुमारी, वर्तिका स्वर्णकार, आरोही मिश्रा, समृद्धि श्रीवास्तव एवं सूर्यान्श सिंह शामिल रहे। प्रस्तुति में नटराज की स्तुति में शिव वंदना, तीनताल में शुद्ध नृत्त और अंत में तराना प्रस्तुत किया गया। तबले पर अनूप बनर्जी तथा लहरे पर अनुराग मिश्रा ने संगत की। बता दें कि केंद्र द्वारा ब्रह्मनाद प्रतियोगिता आयोजित की गई थी, जिसमें दिशा शर्मा ने गायन विधा तथा वैशाली नाथ ने नृत्य विधा में प्रथम पुरस्कार प्राप्त किया था।
गायक संतोष पांडेय ने रामचरितमानस की संकलित चौपाइयों के साथ ‘नटखट कान्हा पकड़े मोरा आँचल’, ‘तेरे आने की जब खबर महके’, ‘इस तरह मोहब्बत की शुरुआत कीजिए’ और ‘मोहे आई न जग से लाज’ प्रस्तुत कर खूब वाहवाही बटोरी।
वहीं मथुरा के गिरधर गोपाल शर्मा ने ब्रज की लोकगायन परंपरा के रंग बिखेरे। उन्होंने ‘राणा जी, तेरे महल-चौबारे छोड़, मैं तो गोविंद-गोविंद गाऊँगी’, ‘साँवरे से मेरी मुलाकात हो गई, सपने में एक अनोखी बात हो गई’, ‘बरसाने की मोर कुटी पे मोर बन आयो रसिया’ और ‘मुरली वाले ने घेर लई अकेली, पनिया गई’ जैसी प्रस्तुतियों से दर्शकों को भावविभोर कर दिया।
दीपावली शिल्प मेले में सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ शिल्पकारों की भागीदारी मेले की विशेषता बनी हुई है। विभिन्न राज्यों के शिल्पकार अपने पारंपरिक हस्तशिल्प, कलात्मक वस्तुओं और स्थानीय शिल्पकला के नमूनों के माध्यम से भारतीय लोक एवं शिल्प परंपराओं को प्रदर्शित कर रहे हैं। कार्यक्रम का संचालन सुधांशु शुक्ला ने किया।









