ATS रिपोर्टर देवेन्द्र कुमार जैन भोपाल मध्य प्रदेश
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में को मंत्रि-परिषद की बैठक मंत्रालय में सम्पन्न हुई। बैठक में प्रदेश के सर्वांगीण विकास और प्रशासनिक तंत्र के सुदृढ़ीकरण के लिए 8 हजार 225 करोड़ रुपये से अधिक की विभिन्न विकास योजनाओं एवं वित्तीय प्रस्तावों को स्वीकृति प्रदान की गई। राज्य में कृषि विस्तार और जल संसाधन प्रबंधन को प्राथमिकता देते हुए छिंदवाड़ा, मुरैना और सागर जिलों की वृहद सिंचाई परियोजनाओं के लिए वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक निरंतर संचालन के लिए 3,378 करोड़ 69 लाख रुपये की मंजूरी दी गई जिससे व्यापक स्तर पर सिंचाई क्षमता का विस्तार होगा। मंत्रि-परिषद ने पर्यावरण संरक्षण एवं क्षतिपूर्ति वृक्षारोपण कार्यों को गति देने के लिए प्रतिकरात्मक वन रोपण निधि (कैम्पा) से 2,050 करोड़ 3 लाख रुपये के उपयोग का अनुमोदन किया गया। जन-स्वास्थ्य सेवाओं को निर्बाध रखने के उद्देश्य से लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग को 1,743 करोड़ 58 लाख रुपये तथा सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन कल्याण योजनाओं के लिए 651 करोड़ 25 लाख रुपये का अनुमोदन दिया गया है। प्रशासनिक व्यवस्था को सुदृढ़ करने के क्रम में नवगठित जिलों-निवाड़ी, मऊगंज, पांढुर्णा और मैहर में जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालयों की स्थापना, नवीन पदों के सृजन, आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) के सुचारू संचालन तथा नागरिक आपूर्ति निगम से जुड़े उपार्जन संबंधी प्रस्तावों को भी स्वीकृति दी गई प्रतिकरात्मक वन रोपण निधि (कैम्पा निधि) योजना क्रियान्वयन के लिए 2,050 करोड़ 3 लाख रूपये की स्वीकृति मंत्रि-परिषद द्वारा प्रतिकरात्मक वन रोपण निधि (कैम्पा निधि) अंतर्गत वर्ष 2026-27 की वार्षिक कार्य योजना के क्रियान्वयन के लिए 2050 करोड़ 3 लाख रूपये के उपयोग की स्वीकृति दी गई है। प्रतिकरात्मक वन रोपण निधि का उपयोग विगत वर्षों के कार्यों के रख-रखाव, क्षतिपूर्ति पौधारोपण, लैण्डस्केप के आधार पर बिगड़े वनों का सुधार, नदियों के पुनर्जीवन के लिए जलग्रहण क्षेत्र के वनीकरण, मृदा एवं जल संरक्षण के कार्य, ग्रामीणों की आजीविका के लिए ग्रामों की सीमा से लगे वनक्षेत्रों में बॉस प्रजाति सहित वृक्षारोपण, वन्यप्राणी संरक्षित क्षेत्रों के गांवों से स्वैच्छिक विस्थापन, बफर क्षेत्र सहित संरक्षित क्षेत्रों में रहवास का विकास, नगर वनों की स्थापना, वन एवं वन्यप्राणी संबंधी अधोसंरचना सुदृढीकरण एवं ग्रामीणों की क्षमता विकास कार्य में किया जा सकता है।।उल्लेखनीय है कि वन (संरक्षण एवं संवर्धन) अधिनियम, 1980 के अंतर्गत विभिन्न विकास कार्यों के लिये वन भूमि व्यपवर्तन के प्रकरण स्वीकृत किये जाते हैं। वन भूमि व्यपवर्तन के प्रकरणों में स्वीकृति जारी करते समय भारत सरकार द्वारा विभिन्न शर्तें अधिरोपित की जाती हैं। इन शर्तों के अनुरूप आवेदक संस्थान से क्षतिपूर्ति वनरोपण, वन्यप्राणी प्रबंधन तथा नेट प्रजेन्ट वेल्यू (एन.पी.व्ही.) आदि की राशि जमा कराई जाती है। इन शर्तों का मुख्य उद्देश्य वन भूमि के व्यपवर्तन से होने वाली क्षति की पूर्ति करना है। आवेदक संस्थानों से इस प्रकार प्राप्त राशि को राज्य की प्रतिकरात्मक वन रोपण निधि (कैम्पा निधि) में रखा जाता है।









