रन फार डा. अम्बेडकर एक उन्नत और समतावादी भारत बनाने का संकल्प है
त्रिभुवन नाथ शर्मा की रिपोर्ट
प्रयागराज। रेबी पाल बालिका और करन निषाद बालक वर्ग से रहे प्रथम रनअप। देवपती मेमोरियल ट्रस्ट और प्रबुद्ध फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में ज्ञान के प्रतीक राष्ट्रनायक बोधिसत्व डा. बाबासाहेब भीमराव रामजी अम्बेडकर (जन्म 14 अप्रैल 1891) की 135 वीं जयंती के सम्मान में अप्रैल माह के प्रथम रविवार को रन फार डा. अम्बेडकर दौड़ का आयोजन हाईकोर्ट स्थित डा. अम्बेडकर प्रतिमा स्थल से डा. अशोक कुमार प्रियदर्शी ने पंचशील का झण्डा दिखाकर शुभारंभ किया। यह दौड़ पत्थर चर्च गिरजाघर, सुभाष चौराहा, तुलसी दास चौराहा, प्रयाग संगीत समिति तिराहा, हार्ट स्टफ चौराहा, जीएचएस चौराहा, प्रधान डाक घर चौराहा से अपने उदगम स्थल तक लगभग तीन किलोमीटर की रन फार डा. अम्बेडकर दौड़ कराई गई।
इस दौड़ में रेबी पाल बालिका वर्ग और करन निषाद बालक वर्ग से प्रथम रनअप रहे तथा यमुना बालिका वर्ग से द्वितीय और आकाश कुमार बालक वर्ग से द्वितीय रनअप रहे।
प्रबुद्ध फाउंडेशन के सचिव उच्च न्यायालय के अधिवक्ता आईपी रामबृज और देवपती मेमोरियल ट्रस्ट की अध्यक्ष आशा रानी आयोजक रन फार डा. अम्बेडकर दौड़ ने बताया कि दौड़ का उद्देश्य डा. भीमराव रामजी अम्बेडकर के समतामूलक, शिक्षित और जागरूक समाज के सपनों को आगे बढ़ाना है। यह दौड़ संविधान के प्रति सम्मान, सामाजिक समानता, एकता, महिला सशक्तिकरण और राष्ट्रवाद की भावना को बढ़ावा देती है। यह समाज को शिक्षित, आंदोलित और संगठित होने का संदेश देती है।
मुख्य अतिथि डा.अशोक कुमार प्रियदर्शी ने बताया कि सामाजिक समरसता और समानता के लिए यह दौड़ विभिन्न वर्गों के लोगों को एक साथ लाती है, जिससे भाईचारा बढ़ता है और जातिवाद को खत्म करने में मदद मिलती है। संविधान के प्रति जागरूकताः यह नागरिकों को डॉ. आंबेडकर द्वारा दिए गए संवैधानिक अधिकारों, स्वतंत्रता और समानता के प्रति जागरूक करती है।
विशिष्ट अतिथि बिन्दु कुमार गौतम ने बताया कि यह दौड़ शिक्षा और महिला सशक्तिकरण यानी बाबा साहेब के “शिक्षित बनो” के संदेश को फैलाकर यह विशेष रूप से हाशिए पर पड़े समुदायों और महिलाओं को शिक्षा के लिए प्रेरित करती है। युवाओं में राष्ट्रवाद की भावनाः यह युवाओं को देश के निर्माण में डॉ. आंबेडकर के योगदान के बारे में शिक्षित करती है और राष्ट्र के प्रति जिम्मेदार बनने के लिए प्रेरित करती है। स्वास्थ्य और एकताः एक साथ दौड़ने से शारीरिक स्वास्थ्य के साथ-साथ एकजुटता का संदेश भी समाज में जाता है। यह दौड़ केवल शारीरिक व्यायाम नहीं, बल्कि बाबा साहेब के आदर्शों को अपनाकर एक उन्नत और समतावादी भारत बनाने का एक संकल्प है।
इस दौड़ में सौरभ पाल, अविनाश कुमार, दीपांशु निषाद, मोहित कुमार, प्राची वर्मा, राखी निषाद, अंजू निषाद, कारन निषाद, अर्पित पाल, गौतम, प्रांजल सिंह पटेल, निशांत पाल, शिवम यादव, विनय बौद्ध, प्रखर आनन्द, आदर्श, शि कुमार, शिव शंकर पटेल, रंजीत कुमार, कुमार सिद्धार्थ, हिमांशु जैसवार, करन कुमार सहित दो दर्जन से अधिक धावक व धाविकाओं ने प्रतिभाग किया।









