सी.एम.पी. डिग्री कॉलेज में पर्यावरणीय न्याय एवं विधि विद्यार्थियों की भूमिका पर विशेष व्याख्यान आयोजित
त्रिभुवन नाथ शर्मा की रिपोर्ट
प्रयागराज। पर्यावरण संरक्षण केवल कानूनी दायित्व नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक का संवैधानिक एवं नैतिक कर्तव्य है : प्रो. वाणी भूषण। सी.एम.पी. डिग्री कॉलेज, प्रयागराज के विधिक सहायता एवं सेवा केंद्र द्वारा विधि विभाग के संयुक्त तत्वावधान में मंगलवार, 27 अक्टूबर 2026 को पर्यावरण संरक्षण एवं पर्यावरणीय न्याय विषय पर विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में पटना विश्वविद्यालय के स्नातकोत्तर विधि विभाग के प्रोफेसर एवं पूर्व विभागाध्यक्ष तथा संकायाध्यक्ष प्रो. (डॉ.) वाणी भूषण उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का विषय “संवैधानिक कर्तव्य के रूप में पर्यावरण संरक्षण : जमीनी स्तर पर पर्यावरणीय न्याय को बढ़ावा देने में विधि विद्यार्थियों की भूमिका” था।
मुख्य वक्ता प्रो. (डॉ.) वाणी भूषण ने अपने संबोधन में कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकार, न्यायालयों अथवा पर्यावरण संबंधी संस्थाओं का दायित्व नहीं है, बल्कि यह प्रत्येक नागरिक का संवैधानिक एवं नैतिक कर्तव्य है। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 के अंतर्गत गरिमापूर्ण जीवन के अधिकार में स्वच्छ एवं स्वस्थ पर्यावरण का अधिकार भी समाहित है। वहीं अनुच्छेद 48A राज्य को पर्यावरण संरक्षण का निर्देश देता है तथा अनुच्छेद 51A(g) प्रत्येक नागरिक पर प्राकृतिक पर्यावरण की रक्षा एवं संवर्धन का मौलिक कर्तव्य अधिरोपित करता है।
उन्होंने कहा कि पर्यावरणीय न्याय की वास्तविक सफलता केवल न्यायालयों के निर्णयों से नहीं, बल्कि उन निर्णयों और विधिक प्रावधानों के प्रति समाज में जागरूकता तथा जनसहभागिता से सुनिश्चित होगी। पर्यावरण प्रदूषण का सर्वाधिक प्रतिकूल प्रभाव प्रायः समाज के गरीब, वंचित एवं कमजोर वर्गों पर पड़ता है। इसलिए पर्यावरणीय न्याय सामाजिक न्याय का भी एक महत्वपूर्ण आयाम है।

विधि विद्यार्थियों की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि विधि विद्यार्थियों को केवल कानून का अध्ययन करने वाला विद्यार्थी नहीं, बल्कि संवैधानिक मूल्यों का संवाहक और सामाजिक परिवर्तन का प्रतिनिधि बनना चाहिए। विधिक सहायता केंद्रों के माध्यम से विद्यार्थी गाँवों, कस्बों एवं वंचित समुदायों तक पहुँचकर लोगों को स्वच्छ पर्यावरण के अधिकार, जल एवं वायु प्रदूषण, अपशिष्ट प्रबंधन तथा पर्यावरण संबंधी शिकायतों के कानूनी उपचारों के प्रति जागरूक कर सकते हैं। उन्होंने विधि विद्यार्थियों से पर्यावरण संरक्षण को अपने दैनिक व्यवहार एवं सामाजिक उत्तरदायित्व का अभिन्न अंग बनाने का आह्वान किया।
विधि विभाग के संयोजक प्रो. शिव शंकर सिंह ने कहा कि वर्तमान समय में पर्यावरण संरक्षण मानव सभ्यता के समक्ष सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है। जलवायु परिवर्तन, बढ़ता प्रदूषण, प्राकृतिक संसाधनों का अनियंत्रित दोहन तथा पर्यावरणीय असंतुलन केवल वैज्ञानिक या प्रशासनिक समस्याएँ नहीं हैं, बल्कि इनके गंभीर संवैधानिक, विधिक एवं सामाजिक आयाम भी हैं। उन्होंने कहा कि विधिक शिक्षा का उद्देश्य केवल दक्ष अधिवक्ता एवं न्यायिक अधिकारी तैयार करना नहीं, बल्कि ऐसे संवेदनशील एवं उत्तरदायी नागरिकों का निर्माण करना भी है, जो समाज और राष्ट्र के प्रति अपने कर्तव्यों को समझें।
प्रो. सिंह ने कहा कि जब विधि विद्यार्थी अपने संवैधानिक ज्ञान को समाज की वास्तविक समस्याओं से जोड़ते हैं, तभी विधिक शिक्षा की सार्थकता सिद्ध होती है। उन्होंने विधिक सहायता एवं सेवा केंद्र द्वारा शैक्षणिक गतिविधियों को सामाजिक सरोकारों से जोड़ने के प्रयासों की सराहना की तथा भविष्य में भी ऐसे कार्यक्रम आयोजित किए जाने की आवश्यकता पर बल दिया।
कार्यक्रम में विधि विभाग के शिक्षकगण प्रो. अजय प्रताप सिंह, डॉ. ब्रह्मदेव पाण्डेय, डॉ. अजय कुमार, डॉ. अमित मिश्रा, डॉ. अशोक कुमार, डॉ. पूर्णेंदु मिश्र, डॉ. पद्मा अपराजिता पारिजा, डॉ. सोनल खरे, डॉ. रजनीश्वर दत्त किशोर, डॉ. नंदिनी रायजादा, डॉ. रितु रघुवंशी तथा डॉ. सत्यवान कुमार नायक उपस्थित रहे।
इसके अतिरिक्त विधिक सहायता एवं सेवा केंद्र के सह-संयोजक डॉ. गौरव पटेल तथा सदस्यगण डॉ. रमेश कुमार सिंह, डॉ. राकेश कुमार गौतम, डॉ. तुषार श्रीवास्तव एवं डॉ अंजलिका सहित केंद्र के स्वयंसेवकों एवं सांस्कृतिक समूह के सदस्यों ने कार्यक्रम में सहभागिता की।
कार्यक्रम का कुशल संचालन सौरभ यादव ने किया। शुभम यादव, शौर्य प्रताप सिंह, इंद्र प्रकाश पटेल, राधे मोहन यादव आदि का विशेष सहयोग रहा।
विशेष व्याख्यान में एलएल.बी., बी.ए.एलएल.बी. एवं एलएल.एम. के विभिन्न वर्षों के विद्यार्थियों ने प्रतिभाग किया। इस अवसर पर विद्यार्थियों को पर्यावरण संरक्षण से जुड़े संवैधानिक दायित्वों, विधिक प्रावधानों तथा जमीनी स्तर पर पर्यावरणीय न्याय की स्थापना में अपनी भूमिका को समझने का अवसर प्राप्त हुआ।









