कौशाम्बी पुलिस ने विभिन्न विद्यालयों के स्टूडेंट्स एवं नागरिकों को किया जागरूक, प्रथम दिन कुल 4400 व्यक्तियों जागरुक किया गया
कौशाम्बी। एसपी राजेश कुमार के निर्देशन में जनपद में चलाया गया नए कानूनों के प्रति जागरूकता अभियान। एसपी राजेश कुमार के निर्देशन में जनपद में नए कानूनों के प्रति जागरूकता के लिए अभियान चलाया गया है। इस दौरान कौशाम्बी पुलिस ने विभिन्न विद्यालयों के स्टूडेंट्स एवं नागरिकों को जागरूक किया है।
पुलिस महानिदेशक, उत्तर प्रदेश के निर्देशानुसार दिनांक 30.10.2025 से 01.11.2025 तक चलाये जा रहे राज्यव्यापी ‘नए आपराधिक कानूनों के प्रति जागरूकता अभियान 2.0’ के तहत, बृहस्पतिवार प्रथम दिन पुलिस अधीक्षक कौशाम्बी राजेश कुमार के नेतृत्व में जनपद कौशाम्बी पुलिस द्वारा जनपद के नागरिकों, छात्र/छात्राओं एवं पुलिस कर्मियों को नये कानूनों के प्रति जागरुक करने हेतु व्यापक जागरुकता अभियान चलाया गया। इसी क्रम में बृहस्पतिवार को पुलिस अधीक्षक कार्यालय स्थित दुर्गाभाभी सभागार में एक कार्यशाला का आयोजन किया गया, जिसकी अध्यक्षता राजेश कुमार सिंह अपर पुलिस अधीक्षक कौशाम्बी द्वारा की गयी।
इस कार्यशाला में संयुक्त निदेशक अभियोजन मोहन यादव द्वारा मुख्य वक्ता के रूप में पुलिस कर्मियों को 01 जुलाई, 2024 से लागू हुए तीन नए आपराधिक कानूनों- भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम के विस्तृत प्रावधानों की जानकारी दी गयी। कार्यशाला में पूर्व प्रचलित आपराधिक कानून भारतीय दण्ड संहिता, दण्ड प्रक्रिया संहिता एवं भारतीय साक्ष्य अधिनियम के स्थान पर नये कानून की आवश्यकता एवं उपयोगिता के बारे में बिस्तार पूर्वक बताया गया। जहां पूर्व में दण्ड व्यवस्था को अत्यधिक महत्व दिया जाता था, उसके स्थान पर नये कानूनों में न्याय व्यवस्था स्थापित करते हुए कानूनों को और अधिक व्यावहारिक एवं पीड़ित केन्द्रित बनाया गया है। इस प्रकार पूर्व प्रचलित भारतीय दण्ड संहिता के स्थान पर भारतीय न्याय संहिता-2023 दण्ड प्रक्रिया संहिता के स्थान पर भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता-2023 एवं भारतीय साक्ष्य अधिनियम के स्थान पर भारतीय साक्ष्य अधिनियम-2023 को 01 जुलाई, 2024 से लागू कर दिया गया है।इसी प्रकार जनपद के समस्त थानों द्वारा चौराहों पर नुक्कड़ सभाओं का आयोजन कर एवं स्थानीय विद्यालयों में भी कार्यशालाएँ आयोजित कर छात्र/छात्राओं एवं शिक्षकों को नए कानूनों के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। इस दौरान डिवेट एवं क्विज प्रतियोगिताओं का आयोजन कर जागरुक किया गया। नये कानूनों के प्रति व्यापक जागरुकता अभियान के अन्तर्गत बृहस्पतिवार प्रथम दिन जनपद कौशाम्बी में 58 स्थानों पर कार्यशाला/नुक्कड़ सभाओं का आयोजन करते हुए कुल 4400 व्यक्तियों जागरुक किया गया एवं 108 स्थानों (चौराहों आदि) पर नये कानूनों के प्रति जागरुता से सम्बन्धित बैनर/पोस्टर लगाये गये। विद्यालयों में छात्र/छात्राओं के मध्य डिबेट/क्विज/चित्रकला/निबन्ध प्रतियोगिताओं के आयोजन कराए गये।
नए आपराधिक कानूनों एवं उनके उद्देश्यों के बारे में विस्तार से जानकारी दी गयी
*एफआईआर दर्ज कराने की प्रक्रिया को सरल और सुलभ बनाना।
*पीड़ितों के अधिकारों को सर्वोपरि रखना और उन्हें त्वरित न्याय सुनिश्चित करना
*समयबद्ध न्याय- मामलों की जांच और ट्रायल के लिए समय-सीमा निर्धारित कर त्वरित न्याय प्रदान करना।
*प्रौद्योगिकी और फोरेंसिक का उपयोग 7 वर्ष या उससे अधिक की सज़ा वाले अपराधों में फोरेंसिक जांच को अनिवार्य करना और डिजिटल साक्ष्य को प्राथमिक साक्ष्य के रूप में मान्यता देना
*महिला एवं बाल संरक्षण- महिलाओं और बच्चों के विरुद्ध अपराधों के लिए कठोर और प्रभावी प्रावधान।
नये कानून की विशेषताएं
*न्याय प्रणाली को जन-केन्द्रित और पीड़ित-केन्द्रित बनाया गया है।
*अब एफआईआर ऑनलाइन भी दर्ज की जा सकती है, जिससे आम जनता को सुविधा मिलेगी।
*ईमेल, एसएमएस या व्हाट्सएप के माध्यम से सम्मन भेजे जा सकेंगे।
*वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से गवाही और ट्रायल की सुविधा दी गई है।
*इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य को कानूनी रूप से स्वीकार किया गया है।
*महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराधों में कठोर सजा का प्रावधान किया गया है।
*महिलाओं के बयान महिला अधिकारी द्वारा लेना अनिवार्य किया गया है।
*महिला उत्पीड़न, पीछा करना ,एसिड अटैक जैसे अपराधों के लिए सख्त दंड तय किए गए हैं।
*देशद्रोह की जगह ‘देश की अखंडता के विरुद्ध कृत्य’ की नई परिभाषा दी गई है।
*भीड़ हिंसा के लिए पहली बार कानून में स्पष्ट सजा तय की गई है
*आतंकवाद और संगठित अपराध को स्वतंत्र अपराध श्रेणी के रूप में शामिल किया गया है।
*अपराधियों और आतंकवादियों की संपत्ति जब्त करने का प्रावधान जोड़ा गया है।
*चार्जशीट दाखिल करने की समय सीमा 60 या 90 दिन तय की गई है।
*ट्रायल शुरू होने के 30 दिनों के भीतर सुनवाई अनिवार्य की गई है।
*हर माह लंबित मामलों की रिपोर्ट कोर्ट द्वारा तैयार की जाएगी।
*हिट एंड रन मामलों में 10 वर्ष तक की सजा का प्रावधान।
*सड़क सुरक्षा, मानव तस्करी और ड्रग अपराधों के लिए कठोर प्रावधान।
*पुलिस जांच और कोर्ट की कार्यवाही की वीडियो रिकॉर्डिंग अनिवार्य की गई।
*गिरफ्तारी के समय आरोपी को उसके अधिकारों की जानकारी देना अनिवार्य।
*पीड़ित को चार्जशीट और ट्रायल की जानकारी देना अब जरूरी है।
*गवाहों की सुरक्षा और बयान प्रक्रिया को सशक्त किया गया है।
*झूठे सबूत देने या डिजिटल डेटा से छेड़छाड़ करने पर कड़ी कार्रवाई होगी।
*मेडिकल रिपोर्ट और अन्य साक्ष्य डिजिटल रूप में स्वीकार्य होंगे।
*कोर्ट की सभी कार्यवाहियाँ और दस्तावेज़ डिजिटल रूप से संरक्षित किए जाएंगे।
*साक्ष्य अधिनियम में ‘डिजिटल और ऑडियो-वीडियो’ साक्ष्य को पूर्ण कानूनी मान्यता दी गई।
*साइबर अपराधों के लिए विशेष प्रावधान और दंड तय किए गए।
*कानून की भाषा सरल, स्पष्ट और भारतीय संदर्भों के अनुरूप बनाई गई है।
*जनता और पुलिस के बीच पारदर्शिता व जवाबदेही सुनिश्चित की गई है।
*न्याय प्रक्रिया को तेज, पारदर्शी और तकनीक सक्षम बनाने का लक्ष्य रखा गया है।










