त्रिभुवन नाथ शर्मा की रिपोर्ट
प्रयागराज। भागवत कथा सुनने से जीवन मरन मुक्ति संभव -जन्मेजय। नर्वदेश्वर महादेव मंदिर परिसर में श्रीमद्भागवत कथा के पांचवें दिन कथावाचक जन्मेजय कृष्ण ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा जो प्रेम से सुनते हैं उनको जीवन मरन और आवागमन से मुक्ति मिल जाती है।
श्रीकृष्ण का जन्म कारागार में हुआ तो देवताओं ने स्तुति की। वासुदेव ने जैसे ही कृष्ण भगवान को टोकरी में लेटाकर सिर पर रखा, उनकी हथकड़ियां और बेड़ियां अपने आप खुल गई, पहरेदार सो गये, यमुना नदी में आगे बढ़ते ही पानी का जलस्तर बढ़ने लगा, श्रीकृष्ण ने अपना पैर नीचे किया और जलस्तर नीचे चला गया वे आसानी ने नदी पार कर नंद गांव पहुंच गए , कंस ने अपने गुप्तचरों को लगाया और पूतना राक्षसी को सक्रिय किया ताकि श्रीकृष्ण को खोज कर मारा जा सके। कंस की बेचैनी बढ़ गई। आज श्रीकृष्ण को छप्पन भोग लगाया गया।

कथा में , सतेन्द्र सिंह, पुण्यशील पाण्डेय, टिंकू राय, नवीन मिश्रा, रमेश सिंह, कैप्टन श्याम नारायण तिवारी, श्रवण कुमार दुबे, संजय सिंह, योगेश तिवारी, सरोज तिवारी, रवि वर्मा आदि मौजूद रहे।










