श्रीराम कथा का समापन पर भंडारा आज
त्रिभुवन नाथ शर्मा की रिपोर्ट
प्रयागराज। पति-पत्नी का झगड़ा से बनता है कोपभवन – प्रपन्नाचार्य। पति-पत्नी में घर झगड़ा होता है तो कोपभवन अपने आप बन जाता है, बनाने की जरूरत नहीं होती है जब महिला अपने बाल खोल कर और बिना मांग भर रहती है घर में अशांति रहती है, किसी बात को लेकर यदि घर में विवाद हो जाय तो पति-पत्नी में बोल चाल बंद नहीं करना चाहिए, यदि बोलचाल बन्द होने पर पड़ोसी मंथरा बन कर बहुत नुक्सान कर सकती है। यह बात सोमवार को आठवें दिन श्रीराम कथा में प्रपन्नाचार्य ने कही।
कालिंदीपुरम में नर्मदेश्वर महादेव मंदिर परिसर में चल रही कथा में कैक ई मंथरा प्रसंग को बहुत अच्छे ढंग से रखा। उन्होंने कहा कि कोपभवन में कैकेई ने दशरथ से भरत को राजगद्दी देने का वरदान मांगा और राम को 14 साल का बनबास मांगा, वंश को बचाने के लिए दशरथ ने कैकेई का चरण पकड़ लिए, तब भी वह उनकी बात नहीं मानी। मंगलवार को नवें दिन श्रीराम कथा के समापन पर भंडारा आयोजित किया गया है जो शाम 5 बजे से शुरू होगा।

कथा में इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति विपिन चन्द्र दीक्षित, हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष राकेश कुमार पाण्डेय , मोतीलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के पूर्व प्राचार्य एस पी सिंह,श्रीनाथ द्विवेदी, रितेश सिंह, आत्मदेव मिश्रा, अमरजीत सिंह मुन्ना, बैजंत मिश्रा, सत्येन्द्र तिवारी, अंकित गौड़, संतोष पाण्डेय, संजय चौरसिया, मनोज कुमार गुप्ता, संजय श्रीवास्तव, रागिनी श्रीवास्तव, घनश्याम गुप्ता, नवनीत श्रीवास्तव , पवन श्रीवास्तव, सीपी मिश्र निर्भय श्रीवास्तव, घनश्याम सिंह, सुशील पांडेय, आदि प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।










