नगाड़ा वादन और दुलदुल घोड़ी की प्रस्तुति ने मोहा मन
त्रिभुवन नाथ शर्मा की रिपोर्ट
प्रयागराज। ‘आपके दिल में क्या है बता दीजिए’ पर झूमे श्रोता। गजलों की दिलकश अदायगी, भजनों की भक्तिमय धुन और लोककलाओं की शानदार प्रस्तुतियों ने दीपावली शिल्प मेले की छठवीं शाम को यादगार बना दिया। उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र, संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार की ओर से आयोजित मेले में कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। कभी गजलों की मधुर धुनों पर श्रोता झूमे तो कभी भजनों के सुरों ने पूरे पंडाल को भक्तिरस से सराबोर कर दिया।

लोककलाओं की प्रस्तुतियों ने सांस्कृतिक संध्या में चार चांद लगा दिए। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि मेजर जनरल धर्मराज राय, केंद्र निदेशक सुदेश शर्मा एवं सलाहकार कल्पना सहाय ने दीप प्रज्वलित कर किया।
गजलों ने श्रोताओं के दिलों को छुआ
सांस्कृतिक संध्या की शुरुआत गजल गायक भूपेन्द्र शुक्ला ने अपनी सुरीली आवाज से की। उन्होंने ‘आपके दिल में क्या है बता दीजिए’, ‘मुझे तुम नजर से गिरा तो रहे हो’, ‘मैं इस जहां की लाज’, ‘इतना जोर से नाची आज’, ‘राहों पर नजर रखना, होठों पर दुआ रखना’ और ‘न समझो कि हम पी गए, पीते-पीते’ जैसी गजलों की प्रस्तुति देकर समां बांध दिया। उनकी गायकी पर श्रोताओं ने जमकर तालियां बजाईं।
भजनों से भक्तिमय हुआ पंडाल
इसके बाद डॉ. आकांक्षा पाल ने भजनों की भावपूर्ण प्रस्तुति से वातावरण को भक्तिमय कर दिया। उन्होंने ‘यह विनती रघुबीर गुसाईं’, ‘यह प्रयाग की धरती, इसकी बात निराली’, ‘राम जपु, राम जपु’, ‘श्री राधे-राधे बोल’ और ‘लहर-लहर में गंगा मइया गाए रे’ जैसे भजनों से श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। उनकी प्रस्तुति पर पंडाल तालियों से गूंज उठा।
बिरहा, नगाड़ा वादन और दुलदुल घोड़ी ने जीता दिल
लोकसंस्कृति की कड़ी में बबलू यादव ने बिरहा गायन के माध्यम से लोकसंगीत की छटा बिखेरी। वहीं, हरियाणा से आए हरेन्द्र पलवल ने दमदार नगाड़ा वादन से दर्शकों में उत्साह भर दिया। राजमणि तिवारी की दुलदुल घोड़ी की प्रस्तुति ने भी दर्शकों की खूब वाहवाही बटोरी। कार्यक्रम का संचालन अभिजीत मिश्रा ने किया।









