गणेश शंकर विद्यार्थी के सिद्धांत आज और प्रासंगिक हो गए हैं।

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शहादत दिवस पर शहीदवॉल पर एक दीपक जलाकर किया गया नमन

 

त्रिभुवन नाथ शर्मा की रिपोर्ट 

प्रयागराज। शहादत दिवस पर गणेश झंकार विद्यार्थी को याद करते हुए वक्तों ने कहा कि विद्यार्थी जी के सिद्धांत आज और प्रासंगिक हो गए हैं। जब समाज बंट रहा है ऐसे में समाज की एकता के लिए प्रयास करना चाहिए।

 

 

वक्ताओं ने कहा कि गणेश शंकर विद्यार्थी ने आजादी के लिए क्रांतिकारियों की मदद की, साथ ही भारतीयों में एकता हो इसके लिए अपने जीवन के अंतिम समय तक प्रयास किया। वक्ताओं ने कहा कि विपरीत परिस्थितियों में गणेश शंकर विद्यार्थी ने कर्मयोगी पत्रिका से अपने साहित्यिक जीवन की शुरुआत की। इसके बाद प्रताप और अन्य पत्रिकाओं के जरिए उन्होंने अपने क्रांतिकारी तेवर को सदैव प्रदर्शित किया। सत्ता के सामने झुके नहीं क्रांतिकारियों को सदेव सहयोग किया जिसकी बदौलत चंद्रशेखर आजाद और भगत सिंह एक हो पाए।

 

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शहीदवॉल पर बिहार विद्यार्थी की स्मृति में उनके चित्र के आगे एक रोशनी जलाकर प्रयाग वासियों ने अपने श्रद्धांजलि अर्पित की।


श्रद्धांजलि अर्पित करने तथा वक्ताओं में वीरेंद्र पाठक डॉ दीप्ति, जगत नारायण तिवारी राहुल दुबे मनोज श्रीवास्तव कुलदीप मिश्रा रानी सिंह अनंत सिंह प्रमुख रूप से रहे। कार्यक्रम का संचालन उत्तम बनर्जी ने किया। अंत में राष्ट्रगान के बाद कार्यक्रम समाप्त हुआ।

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Author: AT Samachar

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