कावड़ियों के खानपान को लेकर रेल प्रशासन के तमाम दावों पर पानी फेर रहे अबैध वेंडर। 

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धर्मेंद्र प्रजापति कीं रिपोर्ट

चंदौली। जहां सावन के महीने में एक तरफ कावड़ियों के खानपान को लेकर रेल प्रशासन तमाम दावे कर रहा है तो दूसरी तरफ रेलवे की सुरक्षा एजेंसियां व कामर्शियल विभाग के अधिकारियों की कार्यशैली पर सवालिया निशान खड़े करती है। रेल अधिकारियों के कारनामो की पोल खोलती यह शर्मनाक तस्वीर पंडित दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन के रेलवे यार्ड की है जहां चलती ट्रेनों मे दर्जनों अवैध वेंडर घटिया खाद्य सामग्री लेकर यार्ड से सवार होते है और रेल यात्रियों सहित तमाम कावड़िये इन घटिया सामग्रियों को खाकर बीमारियों का शिकार बनते जा रहे हैं।

आपको बता दे कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन पर प्रतिदिन डेढ़ सौ से 2 सौ यात्री ट्रेनों का आवागमन होता है जिससे प्रतिदिन करीब 15 से 20 हजार यात्री इन ट्रेनों में सवार होते हैं। देखा जाय तो सावन के महीने में जब कांवड़ियों की भीड़ चल रही है और ट्रेनों की बोगियां यात्रियों के अलावा कावड़ियों से खचाखच भरी रह रही हैं। इसी का फायदा उठाकर अवैध वेंडर रेलवे यार्ड से ही ट्रेनों में सवार होते हैं और घटिया सामग्री को ऊंचे दामों में बेचकर प्लेटफार्म से पहले ही उतर जाते हैं।

 

 

आपको बता दे कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन जहां रेल यात्रियों की सुरक्षा के लिए आरपीएफ जीआरपी की तैनाती है वही कमर्शियल विभाग को भी खानपान के गुणवत्ता व मानक जांच करने की जिम्मेदारी दी गयी है। लेकिन अपने सभी अधिकारों को दरकिनार करते हुए ज्यादा मुनाफा के चक्कर में कमर्शियल विभाग के अधिकारी अवैध वेंडरो का धड़ल्ले से संचालन करा रहे हैं। बताया जाता है कि लाइसेंसी स्टाल संचालकों द्वारा निर्धारित संख्या से ज्यादा अवैध वेंडर वेंडर का संचालन किया जा रहा है वही शाम ढलते ही अवैध वेंडरो की संख्या चार गुना बढ़ जाती है। देखा जाए तो बढ़ती अवैध वेंडरों की संख्या रेल के राजस्व को तो नहीं बढ़ा पाती लेकिन भ्रष्टाचार के दलदल में पैर फैला रहे सुरक्षा एजेंशियो व कामर्शियल विभाग के अधिकारियों की जेबें जरूर गर्म करती है। अब देखने वाली बात यह होगी कि इस वीडियो को देखने के बाद रेल प्रशासन क्या कार्रवाई करता है।

AT Samachar
Author: AT Samachar

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