सनातन धर्म की रक्षा, विश्व जनकल्याण एवं सर्व मनोकामना पूर्ति हेतु अनन्त पार्थिव शिवलिंग निर्माण अभिषेक एवं विसर्जन महायज्ञ 24वें दिन भी अनवरत जारी।

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त्रिभुवन नाथ शर्मा की रिपोर्ट

प्रयागराज। सनातन धर्म की रक्षा विश्व जनकल्याण सम्पूर्ण मनोकामना पूर्ति हेतु जारी अनन्त पार्थिव शिवलिंग निर्माण अभिषेक एवं विसर्जन महायज्ञ भक्तिमय भजन संध्या एवं महाशिवपुराण कथा का कार्यक्रम नैतिक विकास शोध संस्थान सेवा ट्रस्ट प्रयाग के तत्वावधान में त्रिवेणी बाँध स्थित रामजानकी मन्दिर के बगल नागा बाबा की गुफा के सामने पूरे विधि विधान के साथ 24वें दिन भी अनवरत जारी।

आज के मुख्य जजमान के रूप में लोक निर्माण विभाग के सहायक अभियंता ज्योति प्रकाश सपत्नीक, कौशलेंद्र सिंह सपत्नीक, अखिलेश तिवारी सपत्नीक, देवेश श्रीवास्तव, धीरेन्द्र सिंह, रंजीता कुशवाहा, विजय निषाद सपत्नीक, कृपा शंकर उपाध्याय सपत्नीक, ने उपस्थित हो कर पार्थिव शिवलिंग का अभिषेक करते हुए पूजन आरती किया। मुख्य अतिथि के रूप में दारागंज की पार्षद अनुपमा पाण्डेय एवं प्रयागराज को विश्व धरोहर का दर्जा दिलाने के लिए अनवरत संघर्षरत वरिष्ठ समाज सेवी तीर्थराज पाण्डेय उर्फ बच्चा भैया ने आरती कर भगवान भोलेनाथ से विश्व ज़न कल्याण की कामना किया।

यज्ञ संयोजक एवं संस्था के संस्थापक अध्यक्ष श्याम सूरत पाण्डेय ने कहा की शिव महिमा का वर्णन वेदों, पुराणों और अन्य धार्मिक ग्रंथों में मिलता है। उन्हें महादेव, शंकर, भोलेनाथ, नीलकंठ आदि नामों से जाना जाता है। शिव को संहारक, रक्षक और कल्याणकारी माना जाता है। उनकी महिमा अपरंपार है और उनके भक्त उन्हें प्रसन्न करने के लिए विभिन्न प्रकार की पूजा, अर्चना और आराधना करते हैं। शिव को प्रलय का देवता माना जाता है, जो सृष्टि के अंत में सभी का संहार करते हैं। शिव को ब्रह्मांड का निर्माता भी माना जाता है। शिव को ध्यान और योग का देवता माना जाता है, और वे योगियों के गुरु हैं। शिव को भक्तों का कल्याण करने वाला देवता भी माना जाता है। शिव ने समुद्र मंथन के दौरान निकले विष को अपने कंठ में धारण कर लिया था, इसलिए उन्हें नीलकंठ कहा जाता है। शिव के तीन नेत्र हैं, जो भूत, भविष्य और वर्तमान को दर्शाते हैं। शिव की जटाओं में गंगा नदी निवास करती है। शिव के हाथों में डमरू और त्रिशूल होते हैं, जो क्रमशः ध्वनि और शक्ति का प्रतीक हैं। शिव और पार्वती का संयुक्त रूप, जो पुरुष और स्त्री ऊर्जा के मिलन को दर्शाता है। शिव को महाकाल भी कहा जाता है, जो समय के स्वामी हैं।

संस्था के प्रवक्ता एवं महासचिव सत्य प्रकाश पाण्डेय ने समस्त शिवभक्तों से यज्ञ में अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर भगवान शिव के कृपा पात्र बनने की अपील किया। पूरे सावन तक अनवरत चलने वाले कार्यक्रम के 24वें दिवस में मुख्य रूप से आचार्य पवन देव जी महाराज, डॉ सत्या पाण्डेय, अपर्णा द्विवेदी, जय प्रकाश पाण्डेय, विजयानन्द तिवारी, लोकेश मिश्रा, प्रमोद शुक्ला, राजेन्द्र तिवारी दुकान जी, मनोज मिश्रा, रितु राज पांडे, सिद्ध बाबा,  बृजेन्द्र त्रिपाठी, कुमारी रचना त्रिपाठी, अधिवक्ता सुरेन्द्र नारायण मिश्रा, अधिवक्ता सत्य प्रकाश पाण्डेय, अमित सिंह, संजय मिश्रा, आशा पाण्डेय, विनय सिंह उर्फ बड़कू, जितेन्द्र पाल, रामबाबू मिश्रा, मधुबाला पाण्डेय सहित सैकड़ों भक्तगण उपस्थित रहे।

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Author: AT Samachar

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