प्रयागराज। भूमि सुधार कानून के अन्तर्गत भूमिहीन खेतिहर मजदूरों में एक अभियान के तहत ग्रामसमाज की भूमि आवंटन के संबंध में आयुक्त एवं सचिव राजस्व परिषद उत्तर प्रदेश अनुभाग-5 एवं मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश सरकार के आदेशों का जिलाधिकारी प्रयागराज द्वारा अनुपालन करवाने के सन्दर्भ में डा. अम्बेडकर वेलफेयर नेटवर्क (डान) के संस्थापक उच्च न्यायालय के अधिवक्ता आईपी रामबृज का कहना है कि संविधान शिल्पी डा. अम्बेडकर के निर्देशानुसार यदि कृषि और उद्योगों का राष्ट्रीयकरण कर दिया जाए तो उक्त दोनों उत्पादन के साधनों से उत्पादन बढ़ता है उक्त दोनों उत्पादन के स्रोतों का मालिक राज्य है और संविधान के नीति निर्देशक योजना के अनुसार भी जमीनों का आवंटन मूलभूत भूमि सुधार लंबे समय से लंबित है। उत्तर प्रदेश में अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति के भूमिहीन खेतिहर मजदूरों की दयनीय दशा बढ़ गई है। क्योंकि कृषि जगत में कल कारखानों के उपकरणों के इस्तेमाल तथा बैलों द्वारा कृषि कार्य समाप्त होने की वजह से भूमिहीन कृषक मजदूर बेरोजगार हो गए हैं, जिससे उनकी रोजी-रोटी का साधन भी छिन गया है और वह गरीबी से बढ़कर कंगाल की श्रेणी में आ गए है। उनके पास उत्पादन का साधन तथा बेरोजगारी मिटाने का कोई उपाय नहीं है। ऐसी स्थिति में भूमि सुधार के तहत उत्तर प्रदेश के समस्त ग्रामसभाओ में स्थित ग्रामसमाज की जमीन ऊसर, बंजर, परती व सरकारी तथा समाज कल्याण विभाग द्वारा क्रय की गई भूमि व सीलिंग से घोषित अतिरिक्त तथा बेनामी जमीनों को भूमाफियाओं से खाली करवाकर अनुसूचित जाति तथा अनुसूचित जनजाति के भूमिहीन खेतिहर मजदूरों में आवंटित कराने की सख्त जरूरत है। यह काम सरकारी स्तर से बहुत लंबे समय से लंबित है। आश्चर्य की दूसरी बात तो यह है की अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति की पुरानी पुश्तैनी आबादी वाली भूमि मौके के अनुसार आबादी में दर्ज हो ही नहीं रही है। लेखपाल मौके के आधार पर खसरों में अनुसूचित जाति की अवादी दर्ज ही नहीं करते जिसका लाभ उठाकर पुलिस प्रशासन तथा राजस्व विभाग की लचर व्यवस्था के कारण क्षेत्रीय गुण्डे, भू-माफिया भूमिहीनों को उजाड़ कर बेघर कर दे रहे हैं। उक्त मांगो को लेकर डॉन सतत भूमिहीन खेतिहर मजदूरों द्वारा मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश सरकार को रजिस्टर्ड डाक द्वारा आवेदन पत्र भेजकर भूमिहीनों में भूमि आवंटन कराने के सम्बन्ध में मुख्यमंत्री का ध्यान आकृष्ट कराता रहा। मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश ने जिलाधिकारी प्रयागराज को मा. मुख्यमंत्री संदर्भ (कम्प्यूटर सं. 15175230041783) प्रेषक, आयुक्त्त एवं सचिव, राजस्व परिषद, उ. प्र. अनुभाग-5, लखनऊ। सेवा में, विशेष सचिव, (मा. मुख्यमंत्री) मा. मुख्यमंत्री कार्यालय, उत्तर प्रदेश शासन, लखनऊ। संख्या- जे-30/जी-5-मा. मुख्यमंत्री संदर्भ / 2022. दिनांक 13 अप्रैल, 2023 तथा एस -827 से 838 तक /5-136/2024 दिनांकित 17/10/2024 विषय- भूमि सुधार के अंतर्गत खेतिहर मजदूरों को भूमि आवंटन करने के संबंध में जिलाधिकारी प्रयागराज को अवगत कराया गया कि राजस्व संहिता 2006 की धारा-125, 126 व 127 एवं उ.प्र. राजस्व संहिता नियमावली- 2016 के नियम- 119, 120, 121 व 122 द्वारा कृषि पट्टा तथा राजस्व संहिता- 2006 की धारा-63, 64 व 67 (क) एवं उ. प्र. राजस्व संहिता नियमावली-2016 के नियम-61, 62, 63 व 64 के अंतर्गत आवासीय पट्टा दिये जाने का प्राविधान है। इसी क्रम में प्रदेश स्तर पर आवंटन कार्य होता है।
क्योंकि राजस्व संहिता-2006 की धारा-125, 126 व 127 एवं उ.प्र.राजस्व संहिता नियमावली- 2016 के नियम-119, 120, 121 व 122 द्वारा कृषि पट्टा तथा राजस्व संहिता 2006 की धारा- 63, 64 व 67 (क) एवं उ.प्र.राजस्व संहिता नियमावली- 2016 के नियम- 61, 62, 63 व 64 द्वारा आवासीय पट्टा दिये जाने के दृष्टिगत भूमि सुधार के अंतर्गत अनुसूचित जाति तथा अनुसूचित जनजाति के भूमिहीन खेतिहर मजदूरों को भूमि आवंटन करने के संबंध में पृथक से कोई नीति बनाए जाने का औचित्य नहीं है। उक्त के दृष्टिगत प्रकरण निक्षेप किये जाने योग्य है। किन्तु जिलाधिकारी प्रयागराज द्वारा अभी तक यमुनापार की तहसील बारा, करछना, मेजा और कोरांव में उक्त आदेशों का उल्लंघन ही किया गया है। सरकारी स्तर से एक अभियान चलाकर उत्तर प्रदेश की समस्त ग्रामसभाओ में स्थित ग्रामसमाज की जमीन- ऊसर, बंजर, परती व सरकारी तथा समाज कल्याण विभाग द्वारा क्रय की गई भूमि व सीलिंग से घोषित अतिरिक्त तथा बेनामी जमीनों को भूमाफियाओं से खाली करवाकर अनुसूचित जाति तथा अनुसूचित जनजाति के भूमिहीन खेतिहर मजदूरों में आवासीय तथा कृषि कार्य हेतु भूमि आवंटन कराने तथा दलितों की आवादी भूमि मौके के अनुसार खसरे में दर्ज कराने की मांग की जाती रही है।










