देश की आजादी के अठहत्तर सालो में सरकारे आर्थिक और सामाजिक ढांचे को छुआ तक नहीं
त्रिभुवन नाथ शर्मा की रिपोर्ट
करछना प्रयागराज। डा. अम्बेडकर वेलफेयर नेटवर्क (डान) के तत्वाधान में यमुनापार की तहसील करछना के विकास खण्ड व थाना कौंधियारा स्थित ग्रामसभा सोढ़िया में डान के संस्थापक आईपी रामबृज की अध्यक्षता में बैठक की गई।
बैठक को संबोधित करते हुए रामबृज ने बताया कि संविधान निर्माता बाबासाहेब डॉ. भीमराव रामजी अम्बेडकर ने 26 नवंबर 1949 को संविधान सभा में संविधान सौंपते हुए कहा था की जब यह संविधान 26 जनवरी 1950 को लागू होगा तो राजनैतिक रूप से समानता तो मिलेगी किंतु आर्थिक और सामाजिक क्षेत्र में विषमता बनी रहेगी। यदि यह विषमता ज्यादा दिन तक बनी रही तो विषमता से पीड़ित लोग ही संविधान के राजनैतिक ढांचे की धज्जियां उड़ा देंगे। देश की आजादी के अठहत्तर सालो में संविधान द्वारा राजनैतिक ढाँचा तो समान हुआ किन्तु सरकारे आर्थिक और सामाजिक ढाँचे को छुआ तक नहीं। जिससे मेहनतकशों व बहुजनों की भौतिक स्थिति दयनीय और दरिद्रता भरी पड़ी है और सरकारो द्वारा भविष्य में भी इसे दूर करने के आसार नज़र नहीं आ रहे हैं। मेहनतकश बहुजनों की समस्या सम्पत्ति के पुराने रिश्तों से जुड़ी हुयी है। जबकि इस रिश्ते को तोड़कर सम्पत्ति से नये रिश्ते कायम करने की जरूरत है तथा स्वामी और पूँजीवादी शासन को उखाड़ फेंकने और समाजवाद को आगे बढ़ाने की जरूरत है क्योंकि सत्ता साधन है, इस साधन से व्यवस्था नहीं बदलती बल्कि व्यवस्था जनवादी संघर्षों और क्रान्ति से बदलती है और क्रान्ति का अंकुर मेहनतकशों बहुजनों में से ही अंकुरित होना चाहिए और कोई भी जन आन्दोलन तभी सफल होगा जब मेहनतकश बहुजन उसकी आधार में हो, जो भी संविधान बना है उसकी बुनियाद सार्वभौम, समाजवाद, धर्मनिरपेक्षता, गणतांत्रिक लोकतंत्र, हमें इन मूल्यों का बचाव करना है तथा इन मूल्यों पर होने वाले हमलों का मुकाबला करके इन मूल्यों का बचाव करना प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है।
बैठक में लालजी, विजय, राम प्रसाद, शंकरलाल, अश्विनी कुमार, गुरुदीन, मुन्नालाल, नीरज, लवकुश, जितेंद्र, सुशील, बबीता, ज्योति, उर्मिला, अर्चना, सपना, अंजना, विजयलक्ष्मी, उषा, महिमा, पूनम सहित सैकड़ो लोग उपस्थित रहे।










