बिखरा हुआ समाज कभी बादशाह नहीं बन सकता किन्तु दूसरों को बादशाह बना सकता है
त्रिभुवन नाथ शर्मा की रिपोर्ट
करछना प्रयागराज। डा. अम्बेडकर वेलफेयर नेटवर्क (डान) के तत्वाधान में सोमवार को यमुनापार की तहसील व विकासखंड करछना स्थित ग्रामसभा लहबरा में संविधान के सम्मान में संविधान पदयात्रा निकाले जाने के बाबत डान संस्थापक उच्च न्यायालय के अधिवक्ता आईपी रामबृज के नेतृत्व में बैठक की गई।
संविधान पदयात्रा निकाले जाने पर बनी सहमति पर डान संस्थापक उच्च न्यायालय के अधिवक्ता आईपी रामबृज ने बैठक को संबोधित करते हुए बताया कि मान्यवर कांशीराम साहब का कहना था कि हमारे मिशन में साथ देने वाले कुछ लोग थक जायेंगें, कुछ नाराज हो जायेंगे, कुछ बिक जायेंगे। एक जायेगा और ग्यारह आयेंगें भी। साहब का कहना था कि वो सबको नेता नहीं बना सकते, जो छोड़कर जाना चाहते है उनको रोका नहीं जा सकता लेकिन सामाजिक परिवर्तन का काम किसी भी सूरत में रुकना नहीं चाहिए।
आईपी रामबृज ने आगे बताया कि चुनाव के समय जो लोग टिकट ना मिलने से नाराज हो जाते हैं उनके लिए साहब का यही संदेश था कि वो सबको नेता नही बना सकते। दूसरी बात ये भी हैं कि बसपा के लिए मेहनत सबसे ज्यादा दलित शोषित समाज ही करता आया है, बाकी लोग उस मात्रा में मेहनत नहीं करते लेकिन टिकट तो अकेले दलितो को नही दे सकते क्योंकि जब आप टिकट देने में ही बाकी शोषित वर्गों के साथ भेदभाव की नीयत रखोंगे तो कोई आपके साथ क्यों आयेंगा। वैसे भी बसपा समर्थको में इस बात से कम फर्क पड़ता है कि टिकट किसको मिलता है, वो हर हालत मे बसपा का समर्थक बने रहना ही रहना पसंद करते हैं। दलित शोषित समाज का व्यक्ति जो टिकट पाने की लाइन में होता है, उसको लगता है कि उनको ही टिकट मिलना चाहिए लेकिन किसी राज्य में क्या सिर्फ दलित समाज के व्यक्ति को ही हर सीट पर टिकट देकर पार्टी को सीमित करने की सोच के साथ चलाना ठीक रहेगा? भले ही बाकी वर्गो का वोट कम आता हो या परिस्थितियों के अनुसार आता हो लेकिन आता है और वो तभी आता हैं जब बाकी वर्गो को लगे कि ये दल सत्ता में आने पर हमारा भी ख्याल रखेगा।
यूपी में दलित समाज सिर्फ 21-2 3 प्रतिशत हैं, जिसमे से ज्यादा से ज्यादा 80-85 प्रतिशत वोट बसपा की तरफ आया हो सकता है, यानि 17% के आसपास लेकिन बसपा को यूपी में 31 प्रतिशत तक वोट मिले थे, इसीलिए ये सभी टिकट की लालसा रखने वाले दलित नेताओं को समझना चाहिये कि बसपा मे टिकट दलितो को भी मिलेंगा, आदिवासियों को भी मिलेंगा, पिछड़ों को भी मिलेंगा, मुस्लिम समाज को भी मिलेंगा और सवर्णो को भी मिलेगा। सत्ता कोई खिलौना नहीं हैं कि हर समाज आपको सत्ता देने के लिए लड़ेंगा? लड़ना आपको ही है, बाकी लोगों में हो सकता हैं काशीराम साहब के संघर्षो को समझने के लिए वो जज्बा आपसे थोड़ा कम हो, जो आप लोगो में हो और वो अपनी महत्वाकांक्षाओं और अपने समाज के हितो को ध्यान में रखकर बसपा में टिकट चाहता हो। कोई भी पार्टी ऐसे ही सभी जातियों व धर्मो का वोट पाने की कोशिश करती है।
बैठक में अभय राज, मुन्नू लाल, लालजी, दिलीप कुमार, घनश्याम, पुष्पा देवी, मुन्नी देवी, मनीषा, सुनीता देवी, दुर्गावती, विटोला देवी, केवला पती, शीला देवी, मालती, माला देवी, कुसुम, संगीता, सिया दुलारी, सीता देवी, मुनिया, विलय लक्ष्मी, मीना, कमला, राखी के साथ सैकड़ों लोग उपस्थित रहे।










