देवेन्द्र कुमार जैन की रिपोर्ट
भोपाल, मध्य प्रदेश। मध्यप्रदेश शासन का तकनीकी शिक्षा विभाग, बालिकाओं तथा समाज के मुश्किल परिस्थिति में रहने वाले एवं हाशिए पर खड़े समुदायों को तकनीकी शिक्षा (आईटीआई) से जोड़ने के लिए एक व्यापक अभियान चला रहा है। किशोर सशक्तिकरण कार्यक्रम के अंतर्गत झाबुआ जिले के दौरे पर गई यूनिसेफ टीम ने यह देखकर संतोष व्यक्त किया कि 20 किशोरी बालिकाएँ, जो अब तक विद्यालय से बाहर थीं, अब झाबुआ आईटीआई (तकनीकी शिक्षा विभाग, मध्यप्रदेश शासन द्वारा संचालित) में नामांकित हो चुकी हैं। ये बालिकाएँ सिलाई और फैशन डिज़ाइन का एक वर्षीय व्यावसायिक पाठ्यक्रम कर रही हैं। आईटीआई में एडमिशन लेने वाली अधिकांश बच्चियां मजदूर और खेतिहर मजदूरों के घरों से हैं।
जिला प्रशासन झाबुआ और यूनिसेफ की साझेदारी के तहत आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं द्वारा किए गए सर्वेक्षण में लगभग 75 आउट-ऑफ़-स्कूल बालिकाओं की पहचान की गई। इस सर्वे का उद्देश्य उन्हें मौजूदा सरकारी योजनाओं और सेवाओं से जोड़ना, उन्हें सशक्त बनाना तथा बाल विवाह को रोकना था। बालिकाओं और उनके अभिभावकों को विभिन्न विकल्प सुझाए गए—विद्यालय में पुनः नामांकन, ओपन स्कूलिंग, आईटीआई के स्किलिंग प्रोग्राम में दाखिला, साथ ही प्रोत्साहन हेतु आईटीआई, पुलिस थाना, वन-स्टॉप सेंटर आदि का भ्रमण भी महिला एवं बाल विकास और शिक्षा विभाग द्वारा कराया गया। इन प्रयासों के फलस्वरूप 20 बालिकाओं ने झाबुआ आईटीआई में सिलाई एवं फैशन डिज़ाइन कोर्स में नामांकन लिया। इस पहल में झाबुआ के जिला कलेक्टर ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने आईटीआई प्रशासन से समन्वय स्थापित कर इन बालिकाओं के लिए विशेष बैच स्वीकृत करवाया और तकनीकी शिक्षा विभाग से उनकी फीस भी माफ करवाई। पिछले दो महीनों से ये किशोर बालिकाएँ नियमित रूप से अपनी पढ़ाई कर रही हैं और अपने समुदाय की अन्य लड़कियों के लिए प्रेरणा स्रोत बन गई हैं।
बातचीत के दौरान उन्होंने अपने उत्साह, आत्मविश्वास और आकांक्षाएँ साझा कीं—वे फैशन डिज़ाइनर बनना चाहती हैं, नौकरियाँ करना चाहती हैं और अपना स्वयं का व्यवसाय खड़ा करना चाहती हैं। उनके माता-पिता भी उनकी इस पहल पर गर्व महसूस कर रहे हैं। चुनौतियों के बावजूद, ये बालिकाएँ सामाजिक और लैंगिक मानदंडों को चुनौती देकर अपने सपनों की ओर बढ़ रही हैं। यह बहुविभागीय समन्वय का उत्कृष्ट उदाहरण है, साथ ही तकनीकी शिक्षा विभाग की उस प्रतिबद्धता को भी दर्शाता है, जिसके तहत वह राज्य के हाशिए पर खड़े समुदायों, विशेषकर विद्यालय से बाहर की बालिकाओं और बच्चों को सशक्त बनाने के लिए प्रयासरत है। यूनिसेफ टीम ने जिला प्रशासन झाबुआ, तकनीकी शिक्षा विभाग और महिला एवं बाल विकास विभाग के प्रयासों की सराहना की और इसे केवल झाबुआ ही नहीं, बल्कि अन्य जिलों के लिए भी अनुकरणीय मॉडल माना।










