प्रयागराज। “दम-दम मस्त कलंदर”पर जमकर झूमे दर्शक। उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र का शिल्प हाट में इन दिनों भारतीय संस्कृति अपने सबसे रंगीन रूप में खिल रही है। राष्ट्रीय शिल्प मेला में देशभर से आए शिल्पकार परंपरा की बुनावट को आधुनिकता की माँग से जोड़ते हुए ‘वोकल फॉर लोकल’ को नया पंख दे रहे हैं। लोकनृत्यों की गूँज और लोक कलाओं की चमक के बीच यह मेला एक भारत—श्रेष्ठ भारत की भावना को साकार करता दिखाई दे रहा है। शनिवार को कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि आशीष यादव (भारतीय रक्षा लेखा सेवा, प्रयागराज) एवं विशिष्ट अतिथि राजेंद्र कुमार (से.नि.) कार्यक्रम प्रभारी (एनसीजेडसीसी) ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। स्वागत उद्धोबदन कल्पना सहाय, कार्यक्रम सलाहकार ने किया।

वीकेंड होने के कारण मेले में दर्शकों की भारी भीड़ उमड़ी और आने वाले लोगों ने खरीददारी के साथ सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भरपूर आनंद उठाया।
प्रसिद्ध कव्वाल गायिका उजाला परवीनउजाला परवीन ने अपनी सुरीली आवाज़ में एक से बढ़कर एक नग़मे सुनाकर श्रोताओं से जमकर तालियाँ बटोरीं है। सबसे प्यारा हिंदुस्तान हमारा, जान से प्यारा वतन हमारा”, “उसने ऐसा जख्म दिया है, ये दिल हँसना भूल गया”, “इस दिल को बेकरार किया तुमने क्या किया” और “दम-दम मस्त कलंदर” जैसे लोकप्रिय गीतों ने वातावरण को रोमांच से भर दिया।इसके बाद मंजू नारायण ने लोकगीतों की खूबसूरत प्रस्तुतियों से छठी शाम में पारंपरिक सुरों की मिठास घोल दी। उन्होंने “चाहे मार डारा, चाहे काट डारो राजा हम तो यारी करेंगे दिलदारी करेंगे” और “जनक दुलारी के, जानकी प्यारी के मन में बसे श्रीराम” गीतों से दर्शकों के दिल जीत लिए।

लोकनृत्यों की कड़ी में सृष्टिधर महतो एवं दल ने शुंभ-निशुंभ वध पर आधारित प्रभावशाली छऊ नृत्य, दिव्या सुधीर भावे एवं दल ने महाराष्ट्र का मोहक लावणी, कुमार उदय सिंह एवं साथी कलाकारों ने छमासा झूमर और झिंझिया नृत्य की प्रस्तुति देकर दर्शकों को आनंदित किया। वहीं शिवराज विश्वकर्मा ने बिरहा गायन से मंच पर ऊर्जा का संचार किया।

इस अवसर पर काफी संख्या में दर्शक उपस्थित रहे।










