रोहिणी कोर्ट, दिल्ली। पानीपत के एसिड अटैक मामले में सभी आरोपियों को अदालत ने किया रिहा, पीड़िता ने कहा अब कानून पर भरोसा नहीं। आज दिल्ली की रोहिणी कोर्ट ने बीते सन 2009 में हरियाणा के पानीपत में हुए एसिड अटैक के सभी आरोपियों को सबूतों के आभाव में बरी कर दिया।
रोहिणी कोर्ट के एडिशनल सेशन जज जगमोहन सिंह कि कोर्ट ने अपना ये फैसला सुनाया, वही इस केस कि पीड़िता ने कोर्ट के इस फैसले को एक तरफ़ा, पक्षपात और दुर्भाग्य पूर्ण बताया हैँ।
बीते सन 2009 के नंबर माह में दिल्ली कि रहने वाली शाहीन हरियाणा के पानीपत में एक प्राइवेट नौकरी करती थी और वहीं से अपनी हायर एजुकेशन कि शिक्षा ले रही थी, पीड़िता का आरोप हैँ कि उनके ही कंपनी के मालिक और उनकी पत्नी जे उनपर ये एसिड अटैक करवाया था, जिसमे उन्होंने अपनी 1 आँख खो दी थी और करीब 18 से ज्यादा सर्जरी होने के बाद इनका ये चेहरा इस लायक हुआ हैँ, बीते 2014 में इन्होने माननीय सर्वोच्च न्यायालय में अर्ज़ी के बाद उनका ये केस दिल्ली में ट्रंसफर हुआ था और आज 16 साल. कि लंबी कानूनी लड़ाई के बाद उनके सभी गुनहगारो को कोर्ट ने रिहा कर दिया, जिसे लेकर इस केस की एसिड पीड़िता शाहीन काफी निराश नज़र आयी उन्होंने कहा कि 16 साल कि लंबी लड़ाई के बाद आज ऐसा लग रहा था कि उन्हें इन्साफ मिलेगा लेकिन आज कोर्ट ने सभी आरोपियों को बरी कर सबित कर दिया हैँ कि इन्साफ नाम कि कोई चीज दुनिया में होती ही नहीं हैँ। उन्होंने कहा कि केस वापस लेने के लिए मुझे कई बार करोडो रूपये तक का लालच दिया गया लेकिन मैं कानून पर भरोसा कर इन्साफ कि रह देखती रही लेकिन आज आया ये फैसला पूरी तरह एक तरफा हैँ और सिर्फ मेरे लिए नहीं बल्कि मेरे जैसी सेकड़ो एसिड पीड़िताओं कि हार हैँ लेकिन मैं हार नहीं मानूंगी और आगे इस फैसले के खिलाफ हाई कोर्ट में अपील करुँगी और अपनी आखिरी सांस तक इन्साफ के लिए लडूंगी।
वहीँ इस केस में पीड़िता कि वकील ने बताया कि आज कोर्ट का ये फैसला काफी निराशाजनक और हैरान करने वाला हैँ 16 साल कि लंबी कानूनी लड़ाई के बाद भी आज आरोपियों को कोर्ट से सबूतों के आभाव का हवाला देकर बरी करने के आदेश दें दिए गए जोकि उम्मीद से बिलकुल विपरीत हैँ. हम कोर्ट के इस फैसले के खिलाफ आगे हाई कोर्ट में. अपील करेंगे जरूरत पड़ी तो सुप्रीप कोर्ट भी जायँगे…. लेकिन आरोपियों को हर हाल में सजा करवा कर पीड़िता को न्याय जरूर दिलवाएंगे… एक वकील होने के नाते हर किसी पीड़ित को इंसान दिलाना हमारा पेशा हैँ और इसलिए हम इस फिल्ड में आये हैँ।
बरहाल सेशन कोर्ट के इस फैसले के बाद से एसिड अटैक पीड़िता कि आँखों में आंसू आ गए और वो अपने आप को हारा हुआ महसूस कर रही हैँ लेकिन ये न्यायिक प्रकिया का एक हिस्सा हैँ, जिसपर किसी प्रकार की टिप्पणी सही नहीं होंगी, लेकिन ये भी सच हैँ कि यदि एसिड अटैक जैसे गंभीर अपराध कि पीड़िता को भी इन्साफ के लिए इतना लम्बा संघर्ष करना पड़े तो फ़ास्ट ट्रेक कोर्ट, महिलाओ के साथ होने वाले अपराधों के कानूनों में बदलाव, पर सवाल उठना लज़मी हैँ।










