लखीसराय बिहार। सूर्यगढ़ा में स्वामी विवेकानंद जयंती तथा डाॅ0 उदय कान्त के पुण्य स्मरण में देव वृक्ष पीपल के 2 पौधे लगाए गए। दुर्गा मंदिर परिसर,पीरी बाजार, अभयपुर, सूर्यगढ़ा में स्वामी विवेकानंद जयंती तथा डाॅ0 उदय कान्त के पुण्य स्मरण में देव वृक्ष पीपल के 2 पौधे लगाए गए। पौधारोपण का नेतृत्व सुमित कुमार ने किया। पर्यावरण संरक्षण से ही संसार में मानव जीवन सुरक्षित होगा। परन्तु कुछ स्वार्थी लोग अपने निजी स्वार्थ के लिए पड़ोसी देशों से भीषण युद्ध कर रहे हैं। ईरान में तानाशाह सरकार के खिलाफ 15 दिनों से गृहयुद्ध की स्थिति हो गई है। आगजनी की घटना हुई है। इससे पर्यावरण को नुकसान हुआ है। विकसित देश अमेरिका ने तेल प्राप्त करने वेनेजुएला पर हमला करके वहाँ के राष्ट्रपति को बंधक बना लिया है। रूस- उक्रेन महायुद्ध 4 वर्षों से लगातार चल रहा है। इससे लगता है –” संसार तृतीय विश्व युद्ध के मुहाने पर खड़ा है “। इससे प्रदूषण बढ़ेगा विश्व के मानव प्राकृतिक ऑक्सीजन प्राप्त करने के लिए परेशान होंगे।
पर्यावरण भारती 2008 से बिना रूके और बिना थके लगातार पर्यावरण संरक्षण हेतु वृक्षारोपण अभियान चला रहा है। दुनियाभर के मानव को अपने घरों के आसपास कम से कम 10 पेड़ लगाने का आह्वान किया जा रहा है। इससे ही मानव जीवन सुरक्षित होगा। पर्यावरण भारती अभी तक ” 1,22,983(एक लाख बाईस हजार नौ सौ तेरासी) पेड़ लगा चुका है “। भविष्य में संसार के मानव जीवन सुरक्षा हेतु वृक्षारोपण अभियान लगातार चलता रहेगा। अब लक्ष्य है–” वृक्षारोपण अभियान में अधिक से अधिक युवाओं को जोड़ना है”। युवाओं से ही वृक्षारोपण अभियान को गति मिलेगी।
पर्यावरण भारती के संस्थापक, पर्यावरण संरक्षण गतिविधि के प्रांत संयोजक और अखिल भारतीय पेड़ उपक्रम टोली सदस्य राम बिलास शाण्डिल्य ने कहा कि भविष्य में पीने योग्य पानी के लिए दुनियाभर में महायुद्ध होने वाला है। अतः जल को बचायें। बेकार बर्बाद नहीं करें। समुद्र तो खारा जल का भंडार है। मीठे जल का श्रोत तालाब, नदियाँ, झरने हैं। वर्षाजल भी पीने योग्य बनाया जाता है। अतः कहा गया है–“जल की हर एक घूँट से, मिट जाती है प्यास। बूँद- बूँद पानी बचे, ऐसा करें प्रयास। जल संरक्षण के बिना, कहाँ जीव को ठाँव। पछतायेंगे जल बिना, शहर, कस्बा,गाँव। जल के बिना वृक्ष नहीं, वृक्ष बिन ना हो वृष्टि। ना प्राणी ना वृक्ष तो, कैसी होगी सृष्टि। ”
शाण्डिल्य ने बताया कि 12 जनवरी 1863 को स्वामी विवेकानंद जी का जन्म पश्चिम बंगाल के कोलकाता में हुआ था। उनका मूल नाम नरेंद्रनाथ दत्त था। उनके पिता जी विश्वनाथ दत्त कोलकाता हाई कोर्ट के वकील थे। उनकी माता जी भुवनेश्वरी देवी धर्मपरायण मातृ शक्ति थीं। शिक्षा प्राप्त करने के बाद नरेंद्र प्रसिद्ध संत राम कृष्ण परमहंस के प्रमुख शिष्य बने। 1893 में अमेरिका के शिकागो के विश्व धर्म संसद में स्वामी विवेकानंद ने ऐतिहासिक भाषण दिये। इससे प्रभावित होकर आयरलैंड निवासी शिक्षिका मारग्रेट एलिजाबेथ नोबेल स्वामी विवेकानंद की शिष्या बनीं। भारत आकर नारी शिक्षा हेतु विद्यालय खोले। स्वामी विवेकानंद का देहावसान 4 जुलाई 1902 को अल्पायु में ही हावड़ा के बेलूर मठ में हो गया। वे युवाओं के प्रेरणास्रोत थे। अतः भारत सरकार ने 12 जनवरी को राष्ट्रीय युवा दिवस मनाने का निर्णय लिया। स्वामी विवेकानंद जी भारत के महान सन्यासी, आध्यात्मिक गुरू एवं विचारक थे। ऐसे युवा संत के जन्म दिन पर पौधारोपण स्मरणीय कार्य है।
ख्यातिप्राप्त डॉक्टर उदय कान्त के पुण्य स्मरण में देव वृक्ष पीपल का पौधारोपण भी पुनीत कार्य है। पर्यावरण भारती के पौधारोपण में श्रीमती पिंकी कान्त, उद्भव कान्त, उमेश रंजन,राम बिलास शाण्डिल्य,सुमित कुमार,अमरेंद्र मेहता,यागवल्य,रोहित,विशाल,रौशन, सुनील,सुशील इत्यादि ने भाग लिए।










