त्रिभुवन नाथ शर्मा की रिपोर्ट
प्रयागराज। सूखती संवेदनाएं, तड़पता प्रेम नाटक ‘कथा’ ने दिया मार्मिक संदेश। मंच पर धुंधली रोशनी की एक पतली रेखा उभरती है… जैसे अंधेरे को चीरकर कोई स्मृति लौट रही हो। ढोलक की मद्धिम थाप के बीच कथिक की आवाज़ गूंजती है “कहानी सिर्फ कहानी नहीं होती… वह समय की सांस होती है, जो हर युग में जीवित रहती है।”और फिर खुलता है एक ऐसा रंगद्वार, जहां शब्द दृश्य बन जाते हैं, संवेदनाएं पात्रों का रूप ले लेती हैं और इतिहास वर्तमान की आंखों में झांकने लगता है। दर्शक अनायास ही उस संसार में खिंचते चले जाते हैं, जहां प्रेम सूखती नदियों की तरह पुकारता है और पानी किसी अधूरे रिश्ते की तरह बचाए जाने की गुहार लगाता है।यहीं से शुरू होती है वह रंगयात्रा जो याद दिलाती है कि अगर मानवता को बचाना है, तो सबसे पहले प्यार और पानी को बचाना होगा, क्योंकि यही जीवन की दो अंतिम और अनिवार्य कथाएं हैं।

राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय एवं उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र, संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित भारत रंग महोत्सव के तीसरे दिन शुक्रवार को कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि प्रो. भूमिकाकर (विभागाध्यक्ष, संज्ञानात्मक विज्ञान, इलाहाबाद विश्वविद्यालय), केंद्र निदेशक सुदेश शर्मा, कार्यक्रम सलाहकार कल्पना सहाय एवं उपनिदेशक कार्यक्रम डॉ. मुकेश उपाध्याय तथा एस. मलतियार द्वारा दीप प्रज्वलन कर किया गया। द फैक्ट आर्ट एंड कल्चर सोसाइटी द्वारा प्रवीण कुमार के निर्देशन में नाटक ‘कथा’ का प्रभावशाली मंचन किया गया। मंचित नाटक में कथिक गुरिया और लोचन के जीवन के माध्यम से प्रेम और जल-संरक्षण जैसे गहन और समकालीन विषयों को बेहद मार्मिकता के साथ सामने लाती है। कथिक का दृढ़ विश्वास है कि इस दुनिया को बचाना है तो सबसे पहले प्यार और पानी इन दो जीवनदायी तत्वों को बचाना होगा। प्रस्तुति में यह संवेदनशीलता से दिखाया गया कि समय की निर्मम गति अक्सर कोमल, शांत और नाजुक भावनाओं को या तो कुचल देती है या उन्हें अपनी ही तरह कठोर बनने को विवश कर देती है।
‘कथा’ में पानी के संघर्ष को प्रेम के संघर्ष के रूपक में ढालकर उसे सामाजिक और वर्गीय विमर्श की ऊंचाई तक पहुंचाने का प्रभावी प्रयास किया गया। कविता की लय, संगीत की गूंज, सशक्त संवाद, गहन भावाभिव्यक्ति और सधी हुई रंगभाषा के संतुलित संयोजन ने नाटक को न केवल प्रभावपूर्ण, बल्कि दर्शकों को गहराई तक छूने पर मजबूर कर दिया। मंच पर शिवांगी त्रिपाठी, चंदन कुमार वत्स, वैभव सिंह, आयशा सिंह यादव, कमलेश ओझा और देवानंद सिंह ने अपने सशक्त अभिनय से दर्शकों की खूब सराहना बटोरी। कार्यक्रम का संचालन डॉ. आभा मधुर ने किया।










