त्रिभुवन नाथ शर्मा की रिपोर्ट
प्रयागराज। अलवारा झील को प्रकृति पर्यटन उद्यान के रूप में विकसित करने की योजना, मंडलायुक्त ने दिए वैज्ञानिक सर्वेक्षण के निर्देश। मंडलायुक्त सौम्या अग्रवाल की अध्यक्षता में अलवारा झील, कौशाम्बी को प्रकृति पर्यटन उद्यान के रूप में विकसित करने के उद्देश्य से कार्यालय स्थित त्रिवेणी सभागार में बैठक सम्पन्न हुई। लगभग 400 हेक्टेयर क्षेत्र में फैली यह विशाल प्राकृतिक झील अपनी समृद्ध जैव विविधता, प्राकृतिक सौंदर्य, शांत वातावरण तथा प्रवासी पक्षियों के आगमन के कारण एक महत्वपूर्ण पारिस्थितिक क्षेत्र के रूप में जानी जाती है।
बैठक में मंडलायुक्त ने कहा कि अयोध्या, प्रयागराज तथा चित्रकूट जैसे प्रमुख धार्मिक स्थलों के मध्य स्थित होने के कारण इस झील को रामायण पर्यटन सर्किट के अंतर्गत एक प्रमुख प्रकृति पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित किया जा सकता है। उन्होंने निर्देश दिए कि परियोजना की रूपरेखा तैयार करते समय इसके भौगोलिक एवं धार्मिक महत्व को विशेष रूप से ध्यान में रखा जाए।
पर्यावरण के अनुकूल जल पर्यटन गतिविधियों जैसे बोटिंग, जल सफारी, कयाकिंग, पैडल नौका संचालन तथा फ्लोटिंग रेस्तरां की व्यवहार्यता का अध्ययन कराने के भी निर्देश दिए गए। साथ ही झील के आसपास के क्षेत्र के संरक्षण के लिए मनरेगा के माध्यम से सीमांकन करते हुए परिधि दीवार निर्माण का प्रस्ताव तैयार करने को कहा गया। झील के जल की स्वच्छता बनाए रखने तथा जल प्रवाह का वैज्ञानिक सर्वेक्षण कराने के भी निर्देश दिए गए, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि वहाँ नौकायन जैसी गतिविधियाँ संचालित की जा सकती हैं या नहीं।
मंडलायुक्त ने संबंधित विभागों को प्रस्तावित गतिविधियों का वैज्ञानिक सर्वेक्षण कर विस्तृत प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के भी निर्देश दिए, जिसके आधार पर आगे की कार्यवाही की जाएगी। सभी कार्य क्षेत्रीय पर्यटन अधिकारी की निगरानी में कराए जाएंगे। बैठक में स्वास्थ्य पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से झील के आसपास अंतरराष्ट्रीय योग एवं ध्यान केंद्र तथा आयुर्वेद एवं पंचकर्म आधारित स्वास्थ्य विश्राम केंद्र स्थापित करने के प्रस्तावों पर भी चर्चा की गई।

मंडलायुक्त ने स्पष्ट किया कि झील की जैव विविधता और पारिस्थितिक संतुलन को सुरक्षित रखते हुए ही सभी गतिविधियों का योजनाबद्ध विकास किया जाए। साथ ही परियोजना के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु आवश्यक आधारभूत संरचना के विकास पर भी विचार किया गया। झील तट के सौंदर्यीकरण, पेयजल, स्वच्छता और विद्युत व्यवस्था को सुदृढ़ करने तथा पर्यटकों की सुविधा के लिए पर्यटन सहायता केंद्र स्थापित करने के प्रस्तावों पर भी चर्चा की गई।
मंडलायुक्त ने कहा कि इस परियोजना के विकसित होने से क्षेत्र में प्रकृति पर्यटन का एक महत्वपूर्ण केंद्र स्थापित होगा, जिससे स्थानीय युवाओं को रोजगार के अवसर प्राप्त होंगे। साथ ही स्थानीय होटल, परिवहन और खाद्य व्यवसाय को भी प्रोत्साहन मिलेगा।










