रेलवे में कार्यबल युक्तिकरण के नाम पर 2% पद सरेंडर करने का निर्देश रेलवे बोर्ड को वापस लेना होगा – मनोज पाण्डेय।

रेलवे में कार्यबल युक्तिकरण के नाम पर 2% पद सरेंडर करने का निर्देश रेलवे बोर्ड को वापस लेना होगा - मनोज पाण्डेय।

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मई में नई दिल्ली में तय होगी सर्वदलीय देशव्यापी आन्दोलन की रुपरेखा

त्रिभुवन नाथ शर्मा की रिपोर्ट

प्रयागराज। रेलवे में कार्यबल युक्तिकरण के नाम पर 2% पद सरेंडर करने का निर्देश रेलवे बोर्ड को वापस लेना होगा – मनोज पाण्डेय। इण्डियन रेलवे इम्पलाईज फेडरेशन IREF के महामंत्री कामरेड मनोज पाण्डेय ने कार्यबल युक्तिकरण के नाम पर रेलवे बोर्ड द्वारा जारी 2% पदों को सरेंडर करने के निर्देश को रेलवे और देश के हित में घोर विरोधी कदम है करार देते हुए उक्त निर्णय एवं निर्देशों पर अपना विरोध व्यक्त करता है कहा कि जिन नीतियों और निर्देशों के द्वारा जोनल रेलवे तथा उत्पादन इकाइयों और अन्य रख-रखाव वाली इकाइयों को वर्ष 2026-27 के लक्ष्य के रूप में 01.04.2026 तक की स्वीकृत पदों में से 2% पद सरेंडर करने का निर्देश दिया गया है। उसे रेलवे बोर्ड को वापस लेना पड़ेगा।

कामरेड मनोज ने कहा कि कर्मचारी किसी भी उत्पादन की रीढ़ होते हैं लेकिन सरकार द्वारा लगातार कर्मचारियों की छंटनी और ठेकेदारी प्रथा एवं आउटसोर्सिंग की नीतियों के द्वारा चंद पूंजीपतियों के माध्यम से दिहाड़ी मजदूरों के हक अधिकारों पर कुठाराघात की नीतियों को किसी भी तरह से उचित नहीं ठहराया जा सकता है। भारतीय रेलवे का परिचालन और उसकी सुरक्षा का दायित्व और जिम्मेदारी रेलवे कर्मचारियों पर होती है। रेलवे कर्मचारियों की नैतिक एवं प्रशासनिक बड़ी जिम्मेदारी के कारण कार्य में जरा भी लापरवाही नहीं बरतता है। रेलवे कर्मचारियों को अपनी ड्यूटी के दौरान तमाम आधुनिकीकरण और विस्तार के बावजूद भी ट्रेन परिचालन और संरक्षित संचालन की पूरी जिम्मेदारी कर्मचारियों पर ही होती है। रोष व्यक्त करते हुए कर्मचारी. नेता ने कहा कि एक तरफ रेलवे कर्मचारियों की संख्या को घटाने की कवायद और उसी काम को करने के लिए आउटसोर्सिंग/अनुबंधीकरण के माध्यम से ठेकेदार और आऊटसोर्सिंग के माध्यम से दिहाड़ी मजदूरों की भर्ती करना यह साबित करता है कि बिना कर्मचारियों के चाहे वह सरकारी हों या प्राइवेट, के बिना वास्तव में काम या उत्पादन नहीं किया जा सकता है। इसलिए रेलवे के हुए परिचालन और संरक्षित संचालन के लिए सरकारी रेलवे कर्मचारियों की संख्या घटाने की बजाय बढ़ाना चाहिए। कर्मचारियों की संख्या कटौती के बजाय भर्ती करना रेलवे और देश हित में है।

गौरतलब है कि विभिन्न श्रेणियों में लगभग *2.5 से 2.75 लाख रिक्त पदों* को तुरंत भरने की आवश्यकता है। वर्तमान समय में कर्मचारियों की घटती संख्या के कारण कर्मचारियों पर लगातार वर्कलोड बढ़ता जा रहा है, जिसके कारण रेलवे कर्मचारियों पर मानसिक दबाव भी लगातार बढ़ता जा रहा है, जिसके कारण रेलवे के विभिन्न जोनों से कर्मचारियों की खुदकुशी के मामले सामने उजागर हो रहे हैं। जो कि यह बहुत ही चिंताजनक बात है। इसके साथ ही रेलवे ट्रैक का रख-रखाव करने वाले ट्रैक मैंन्टेनर कर्मचारियों की रन ओवर होने की बहुत ही दुखद समाचार मिलते हैं। जो कि रेलवे के सुरक्षित संचालित करने के लिए बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है।

कामरेड मनोज ने बताया कि इस संबन्ध में रेलवे बोर्ड को एक माँग पत्र भी सौंपा गया है जिसमे इण्डियन रेलवे इम्प्लॉईज़ फेडरेशन ने रेलवे के सुरक्षित संलाचन एवं उत्पादन के लिए कर्मचारियों के छंटनी वाली नीतियों का पुरजोर विरोध करते हुए उक्त आदेश को तत्काल प्रभाव से निरस्त करने की माँग करते हुए खाली पदों को भरने के लिए नई भर्ती प्रक्रिया अविलम्ब शुरू करने की मांग किया है।

रेल कर्मचारियों की कटौती रोकने के लिए आन्दोलन की रूप रेखा की जानकारी देते हुए कामरेड मनोज ने बताया कि आन्दोलन को देशव्यापी बनाने के लिए मई में रेल के सभी संगठनों से बात चीत करके नई दिल्ली में एक सर्वदलीय बैठक आयोजित किया जायेगा।

AT Samachar
Author: AT Samachar

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