त्रिभुवन नाथ शर्मा की रिपोर्ट
प्रयागराज। एक तरफ आग दूसरे तरफ पानी, झोला छाप डॉक्टर की दिलचस्प कहानी। प्रयागराज मंडल के कौशांबी जनपद के मनोरी कस्बे में रहने वाले एक डॉक्टर को लेकर पिछले कई वर्षों से बहस छिड़ी है की डॉक्टर असली है या नकली और इसे जो सर्टिफिकेट डब्लूएचओ यानी विश्व स्वास्थ्य संगठन की टीम ने जो सर्टिफिकेट जारी किया है आखिर उसको लेने वाला असली था या नकली अब तक स्वास्थ्य विभाग यह तय नहीं कर सका की लेने वाला असली है या नकली जबकि यह मामला पिछले 15 साल से इस कौशांबी के स्वास्थ्य विभाग के लिए गले की फांस बन चुका है।
जानकारी के अनुसार लकवा जैसी गंभीर बीमारी को जड़ से समाप्त करने का दावा करने वाले डॉक्टर एके मिश्रा मनोरी में क्लीनिक चलाते हैं इस बीच उन्हें विश्व स्वास्थ्य संगठन की टीम ने पोलियो उन्मूलन में उत्कृष्ट योगदान के लिए एक प्रमाण पत्र जारी किया इसके बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम ने उन्हें फर्जी चिकित्सक घोषित कर और मुकदमा दर्ज कर जेल भेज दिया डॉक्टर जमानत पर छूट कर आए तो उन्होंने स्वास्थ्य विभाग को खुली चेतावनी दे डाली और दावा किया कि उन्हें जो सर्टिफिकेट मिला है वह विश्व स्वास्थ्य संगठन ने मेरे काम को देखकर दिया था।
वही विभाग का दावा है कि यह सर्टिफिकेट दूसरे के नाम जारी हुई थी जिसे डॉक्टर ने हासिल कर लिया। अब तक स्वास्थ्य की टीम उसे व्यक्ति को नहीं ला सकी जिसके नाम से यह सर्टिफिकेट जारी हुआ था जबकि डॉक्टर एके मिश्रा का दावा है कि अगर वह नकली है तो सर्टिफिकेट उन्हें कैसे मिलेगी और यदि वह सही है तो उन्हें कौशांबी का स्वास्थ्य विभाग बदनाम क्यों कर रहा है।










