त्रिभुवन नाथ शर्मा की रिपोर्ट
प्रयागराज। ‘मिशन वंदे मातरम्’ ने जगाई देशभक्ति की अलख, नन्हे कलाकारों के अभिनय ने जीता दर्शकों का दिल। ज़रा सोचिए, आज के दौर के कुछ बच्चे जो 15 अगस्त और 26 जनवरी को सिर्फ ‘छुट्टी का दिन’ मानते हैं, अगर अचानक एक टाइम मशीन में बैठकर सीधे साल 1942 के ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ के बीच पहुँच जाएँ, तो क्या होगा? कुछ ऐसा ही जादुई और रोमांचक नज़ारा गुरुवार को उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र के प्रेक्षागृह में देखने को मिला। अवसर था नाटक ‘मिशन वंदे मातरम्’ के मंचन का। महज़ 8 से 12 साल के नन्हें कलाकारों ने जब मंच पर देशभक्ति, साहस और दोस्ती का जादू बिखेरा, तो हॉल में बैठा हर दर्शक भावुक हो उठा। बच्चों ने अपनी कड़क आवाज़ और शानदार अभिनय से दिखा दिया कि रंगमंच सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि देशप्रेम की एक बड़ी पाठशाला है।
नाटक उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र , संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा आयोजित तीस दिवसीय की ग्रीष्मकालीन प्रस्तुतिपरक बाल रंगमंचीय कार्यशाला का आखिरी पड़ाव था। कार्यक्रम की शुरुआत मुख्य अतिथि राजेन्द्र प्रताप (सचिव, परीक्षा नियामक प्राधिकारी, डाइट, प्रयागराज), केंद्र निदेशक सुदेश शर्मा और कार्यक्रम सलाहकार कल्पना सहाय ने दीप जलाकर किया।
प्रशिक्षक युवा रंगकर्मी प्रत्युष वर्सने एवं सहायक आकाश अग्रवाल के मार्गदर्शन में तैयार नाटक की कहानी बेहद दिलचस्प थी। खेल-खेल में आज के बच्चों को एक सीक्रेट टाइम मशीन मिलती है, जो उन्हें आजादी की लड़ाई के दौर में ले जाती है। वहाँ उनकी दोस्ती भोलू और कमला से होती है, जिनके भाई को गोरे पुलिसवालों ने जेल में बंद कर रखा है। फिर क्या था! आज के बच्चे उन बच्चों के साथ मिलकर ‘आज़ादी की टोली’ बनाते हैं और अपनी सूझबूझ व एकता के दम पर अंग्रेजों को छकाते हुए भाई को छुड़ा लेते हैं। नाटक के क्लाइमेक्स में जब मंच पर तिरंगा फहराया गया, तो पूरा हॉल ‘वंदे मातरम्’ के नारों और तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।
नाटक में जहाँ एक तरफ देशभक्ति का जज़्बा था, वहीं दूसरी तरफ जमकर कॉमेडी भी थी। ब्रिटिश ऑफिसर बने ‘इंस्पेक्टर पिंपल’ और ‘हवलदार डंडा’ के मज़ेदार किरदारों ने दर्शकों को खूब हँसाया। मंच पर शानदार अभिनय करने वाले बाल कलाकारों में ईवा राज, मनश्वी राज सिंह, ईशा देव, कृतिका, आराध्या सरगम, अम्बिका, नित्या जायसवाल, दिवा त्रिपाठी, गर्वित धानी, राजश्री मौर्य, कौस्तुभ चौबे, वेदांश पटेल, प्रणीत खरे, अनमोल, प्रथम शुक्ल और आयज़ा फरोग अहमद शामिल रहे, जिन्होंने अपने शानदार अभिनय से दर्शकों से खूब वाहवाही पाई।
इस अवसर पर केंद्र निदेशक सुदेश शर्मा ने प्रशिक्षक प्रत्युष वर्सने और सहायक प्रशिक्षकआकाश अग्रवाल को पौधा और अंगवस्त्र देकर सम्मानित किया। केंद्र निदेशक ने कहा कि रंगमंच से बच्चों का आत्मविश्वास और व्यक्तित्व का विकास होता है। ऐसी वर्कशॉप हमारी नई पीढ़ी को अपने गौरवशाली इतिहास और संस्कारों से जोड़ने का काम करती हैं।
इस अवसर पर दर्शकों सहित केंद्र के समस्त अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन मनोज कुमार ने किया।










