भरतपुर, राजस्थान। भरतपुर के अस्पताल में रक्षक बनी भक्षक। सीएम सिटी भरतपुर के आरबीएम अस्पताल में सरकारी डॉक्टरों की कथित कमीशनखोरी और मरीजों की मजबूरी का सौदा करने का एक और शर्मनाक कारनामा बेनकाब हुआ।
पीड़ित परिजनों का आरोप है कि ईएनटी विशेषज्ञ डॉ प्रियंका अग्रवाल द्वारा नाक में मांस बढ़ने की समस्या से तड़प रही हलैना निवासी गरीब युवती संजना को इलाज के नाम पर अपने निजी अस्पताल ‘गोपाल जी सुपर स्पेशलिटी’ में ट्रांसफर कर दिया गया। पीड़ित परिवार का आरोप है कि सरकारी अस्पताल में मुफ्त होने वाले इस ऑपरेशन के लिए निजी क्लीनिक पर डॉक्टरों द्वारा सौदा करते हुए पहले 25 हजार रुपए मांगे गए और जब सब्जी की ढकेल लगाकर बमुश्किल परिवार पालने वाले पिता ने लाचारी जताई गई तो महज एक हजार रुपए की ‘छूट’ देकर 24 हजार रुपए ऐंठने की जिद पर अड़े रहे। उक्त अमानवीय व्यवहार से तंग आकर पीड़ित परिजनों द्वारा लिखित शिकायत दी गई है जिसके बाद दूसरे डॉ अभय शर्मा से युवती का निशुल्क ऑपरेशन करवाया गया था।
प्राप्त जानकारी अनुसार अस्पताल प्रशासन की सुस्त कार्यप्रणाली और डॉक्टरों की इस खुली लूट के द्वारा सरकारी स्वास्थ्य दावों की धज्जियां उड़ाकर रखदी गई हैं। कमीशनखोर आरोपी डॉ प्रियंका अग्रवाल के खिलाफ इसी महीने में ‘निजी क्लीनिक पर बुलाकर पैसे ऐंठने’ का यह दूसरा गंभीर मामला सामने आया है। प्राप्त जानकारी अनुसार इससे पहले शिव नगर की एक अन्य युवती द्वारा भी ऐसी ही लिखित शिकायत दी गई थी, लेकिन अस्पताल प्रशासन फाइलों को दबाकर बैठ गया और कोई सख्त एक्शन नहीं लिया गया था। लोगो का कहना है कि इसी ढर्रे का नतीजा है कि आज एक गरीब परिवार को अपनी बेटी के इलाज के लिए दर-दर भटकना पड़ा हालांकि बवाल बढ़ने पर अस्पताल प्रशासन द्वारा जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी तो गठित करदी गई है लेकिन जनता के बीच यह तीखा सवाल गूंज रहा है कि पहली शिकायत पर ही कमीशनखोर डॉ प्रियका अग्रवाल को निलंबित क्यों नहीं किया गया था और आखिर कब तक सरकारी वेतन उठाने वाले ये डॉक्टर गरीबों की बेबसी का तमाशा बनाकर अपनी निजी तिजोरियां भरते रहेंगे।









