सफाई के नाम पर लूट, तालाब में खेती, प्रधान-सेक्रेटरी की जोड़ी पर भ्रष्टाचार की बौछार
मीडिया प्रभारी अवनीत कुमार शर्मा की रिपोर्ट
रामपुर। पसियापुरा बना कीचड़ का नरक, बच्चों की जान से खिलवाड़। जनपद स्वार तहसील के थाना अजीमनगर क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पसियापुरा में सरकारी योजनाओं की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। गांव की हालत ऐसी हो चुकी है कि आम लोगों का घर से निकलना दूभर हो गया है, वहीं नन्हे-मुन्ने बच्चों का स्कूल जाना किसी खतरे से कम नहीं। गांव की सड़कों पर चारों ओर कीचड़, गंदगी और जलभराव फैला हुआ है, जिससे आए दिन बच्चे फिसलकर गिर रहे हैं। बावजूद इसके जिम्मेदारों की आंखों पर पट्टी बंधी हुई है।
ग्रामीणों का आरोप है कि ग्राम प्रधान मिस्किन जहां पत्नी ताहिर अली और ग्राम सचिव की मिलीभगत से सफाई के नाम पर सरकार से लाखों रुपये निकाल लिए गए, लेकिन धरातल पर न सफाई दिखाई देती है और न ही कोई विकास कार्य। गांव की गलियां बदबू और कीचड़ से सन रही हैं, जिससे संक्रामक बीमारियों का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है।
स्कूल तोड़े गए, सामान बेचा गया। विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार, गांव में स्थित दो स्कूलों को कथित रूप से तुड़वाकर उनका कीमती सामान बेच दिया गया, जिससे शिक्षा व्यवस्था पर भी गहरा आघात पहुंचा है। सवाल यह है कि आखिर बच्चों के भविष्य से ऐसा खिलवाड़ किसके इशारे पर किया गया?
तालाब मुक्त अभियान की उड़ाई जा रही धज्जियां
एक ओर रामपुर के जिलाधिकारी द्वारा तालाब मुक्त अभियान चलाया जा रहा है, तो दूसरी ओर पसियापुरा में तालाब पर अवैध कब्जा कर खेती-बाड़ी कराई जा रही है। सूत्रों का दावा है कि यह सब कुछ ग्राम प्रधान और सचिव की शह पर हो रहा है। तालाब, जो गांव के जल संरक्षण का अहम साधन है, आज निजी खेत में तब्दील होता नजर आ रहा है।
योजनाओं का पैसा फर्जीवाड़े से हड़पा गया
ग्रामीणों का यह भी आरोप है कि कई सरकारी योजनाओं का पैसा फर्जी तरीके से निकाल लिया गया, लेकिन गांव में न सड़क बनी, न नाली, न सफाई और न ही बच्चों के लिए सुरक्षित रास्ता। कागजों में विकास और जमीन पर तबाही—यही पसियापुरा की सच्चाई बन चुकी है।
प्रशासन मौन, ग्रामीणों में उबाल
ग्रामीणों में इस पूरे मामले को लेकर भारी रोष है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते प्रशासन ने कार्रवाई नहीं की तो किसी बड़े हादसे से इनकार नहीं किया जा सकता। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से उच्चस्तरीय जांच, दोषियों पर कड़ी कार्रवाई और गांव में तत्काल सफाई व विकास कार्य शुरू कराने की मांग की है।
अब बड़ा सवाल यह है कि क्या जिला प्रशासन पसियापुरा की बदहाली पर संज्ञान लेगा? या फिर भ्रष्टाचार की यह कीचड़ यूं ही बच्चों के भविष्य को निगलती रहेगी?










