रामपुर रज़ा पुस्तकालय एवं संग्रहालय तथा राष्ट्रीय कला मंच, रामपुर के संयुक्त तत्वावधान में राष्ट्रीय युवा दिवस के उपलक्ष्य में “विकसित भारत 2047 में युवाओं की भूमिका” विषय पर एक विचार-संगोष्ठी का गरिमामय एवं सफल आयोजन।

रामपुर रज़ा पुस्तकालय एवं संग्रहालय तथा राष्ट्रीय कला मंच, रामपुर के संयुक्त तत्वावधान में राष्ट्रीय युवा दिवस के उपलक्ष्य में “विकसित भारत 2047 में युवाओं की भूमिका” विषय पर एक विचार-संगोष्ठी का गरिमामय एवं सफल आयोजन।

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मंडल प्रभारी अवनीत कुमार शर्मा की रिपोर्ट 

 

रामपुर। रामपुर रज़ा पुस्तकालय एवं संग्रहालय तथा राष्ट्रीय कला मंच, रामपुर के संयुक्त तत्वावधान में राष्ट्रीय युवा दिवस के उपलक्ष्य में “विकसित भारत 2047 में युवाओं की भूमिका” विषय पर एक विचार-संगोष्ठी का गरिमामय एवं सफल आयोजन। रज़ा पुस्तकालय परिसर में किया गया।

कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन के साथ किया गया। विचार-संगोष्ठी के दौरान वक्ताओं ने स्वामी विवेकानंद जी के जीवन, दर्शन एवं युवाओं के प्रति उनके दृष्टिकोण पर विस्तार से प्रकाश डाला तथा शिक्षा, चरित्र निर्माण, आत्मनिर्भरता और राष्ट्र निर्माण में युवाओं की भूमिका जैसे विषयों पर विचार व्यक्त किए।

कार्यक्रम की अध्यक्षता रामपुर रज़ा पुस्तकालय एवं संग्रहालय के निदेशक डॉ. पुष्कर मिश्र जी ने की। अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में डॉ. पुष्कर मिश्र जी ने स्वामी विवेकानंद जी के विचारों को युवाओं के लिए पथप्रदर्शक बताते हुए कहा कि सशक्त, शिक्षित एवं मूल्यनिष्ठ युवा ही “विकसित भारत 2047” के लक्ष्य को साकार कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि जब हम किसी महापुरुष की जयंती मनाते हैं, तो उसका आशय यही होता है कि हम उनके जीवन, उनके आचरण और उनके विचारों से कुछ सीखें। आज यह समझना आवश्यक है कि विकसित भारत 2047 में युवाओं की क्या भूमिका होगी और उस लक्ष्य तक भारत को पहुँचाने में उनका योगदान किस प्रकार का होगा। डॉ. मिश्र जी ने कहा कि वर्ष 1750 में भारत की अर्थव्यवस्था विश्व की सकल अर्थव्यवस्था का लगभग 24 प्रतिशत थी। उस समय पूरे यूरोप की अर्थव्यवस्था मात्र 23 प्रतिशत थी और केवल एक ही देश भारत से आगे था, वह था चीन, जिसकी अर्थव्यवस्था लगभग 30 प्रतिशत थी। वर्ष 1750 में भारत एक विकसित और समृद्ध राष्ट्र था, जिसका कोई सानी पूरे विश्व में नहीं था। इससे भी लगभग एक हजार वर्ष पूर्व भारत की अर्थव्यवस्था विश्व की कुल अर्थव्यवस्था का लगभग 40 प्रतिशत थी, इसी कारण भारत को “सोने की चिड़िया” कहा जाता था। उन्होंने बताया कि लगभग 275 वर्ष पूर्व भारत की आर्थिक स्थिति इतनी सुदृढ़ थी कि निर्धन से निर्धन महिला भी सोने के आभूषण धारण करती थी। यही भारत की वैश्विक आर्थिक शक्ति का प्रमाण था। भारत से व्यापार करने के लिए देश-विदेश के व्यापारी लालायित रहते थे और अवसर खोजते थे। उस समय भारत की शिक्षा व्यवस्था भी अत्यंत समृद्ध थी

उद्बोधन से पूरे विश्व को भारतीय मनीषाकि “चरैवेति चरैव”—चलते रहो, चलते रहो—के मंत्र पर चलते हुए ज्ञान, विज्ञान, पुलिस अधीक्षक, रामपुर ने कहा कि 12 जनवरी को स्वामी विवेकानंद जी का जन्मोत्सव राष्ट्रीय युवा दिवस के रूप में मनाया जाता है। इसी उपलक्ष्य में आज यह कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है, जिसके लिए मैं रामपुर रज़ा पुस्तकालय का हृदय से धन्यवाद करता हूँ। स्वामी विवेकानंद जी के बारे में सभी जानते हैं कि उन्होंने मात्र 39 वर्ष का जीवन जिया और इतने कम समय में अपनी अमिट छाप छोड़ी। योग और वेदांत पर उनकी दर्शनशास्त्रीय सोच से सम्पूर्ण विश्व परिचित है। दिल्ली से लेकर वेल्लूर तक शायद ही कोई ऐसा जिला होगा जहाँ स्वामी विवेकानंद जी से संबंधित कुछ न कुछ न हो—चाहे वह संग्रहालय हो या अस्पताल—उनके नाम पर अनेक संस्थान संचालित हो रहे हैं। यह वास्तव में अत्यंत प्रेरणादायक है कि जिस व्यक्तित्व ने इतने कम समय में जो उपलब्धियाँ प्राप्त कीं, वे आज भी हम सभी के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं। उस समय न तो प्रचार–प्रसार के आधुनिक साधन थे और न ही साक्षरता का स्तर इतना ऊँचा था, फिर भी ऐसी उपलब्धियाँ हासिल करना एक असाधारण कार्य था। स्वामी विवेकानंद जी का सबसे प्रसिद्ध संदेश था—“उठो, जागो और तब तक मत रुको जब तक लक्ष्य की प्राप्ति न हो जाए।” इसी भावना के साथ मैं सभी युवाओं से आह्वान करता हूँ कि वे जो भी लक्ष्य निर्धारित करें, उसकी प्राप्ति तक निरंतर प्रयासरत रहें।

इस अवसर पर प्रोफेसर सनी सिंह जी, डी ० एस ० एम ० महाविद्यालय, काँठ, मुरादाबाद ने कहा कि हम सभी जानते हैं कि 12 जनवरी 1863 को स्वामी विवेकानंद जी का जन्म हुआ था,
इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएँ, शोधकर्ता, विद्वान एवं शहर के गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे, जिनकी सक्रिय सहभागिता से कार्यक्रम अत्यंत सार्थक एवं प्रेरणादायी बना।
कार्यक्रम का समापन राष्ट्र निर्माण के प्रति युवाओं की प्रतिबद्धता को दोहराते हुए राष्ट्रगान के साथ गरिमापूर्ण वातावरण में सम्पन्न हुआ।

AT Samachar
Author: AT Samachar

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