त्रिभुवन नाथ शर्मा की रिपोर्ट
प्रयागराज। नृत्य नाटिका ने दर्शकों को किया मंत्रमुग्ध। उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र (एनसीज़ेडसीसी), संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार एवं संस्कार भारती के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित “चलो मन गंगा–यमुना तीर” कार्यक्रम के अंतर्गत बुधवार की सांस्कृतिक संध्या नृत्य नाटिका, ब्रज की लोकधुनों और लोकनृत्यों के रंग में रंगी रही। माघ मेला क्षेत्र में आयोजित इस संध्या ने दर्शकों को भक्ति, कला और लोक संस्कृति की अविस्मरणीय अनुभूति कराई।
कार्यक्रम की शुरुआत कृष्ण लीला पर आधारित नृत्य नाटिका से हुई, जिसमें तरुण चोपड़ा एवं उनके साथी कलाकारों ने श्रीकृष्ण के जन्म से लेकर उनकी विविध लीलाओं को अत्यंत सजीव ढंग से प्रस्तुत किया। नृत्यनाटिका में माखन चोरी, गोपियों संग रास, कालिया नाग मर्दन, फूलों की होली, मयूर नृत्य, लठमार होली तथा राधिका रानी के साथ प्रेम प्रसंग जैसे प्रसंगों को भावपूर्ण अभिनय और नृत्य के माध्यम से दर्शाया गया। इन लीलाओं ने दर्शकों का मन मोह लिया।
इसके बाद मथुरा से आए अरुण रावल एवं उनके दल ने ब्रज के प्रसिद्ध लोकगीतों की प्रस्तुति दी। “रंगीली मनमोहन होरी रे”, “करियो करियो बेड़ापार”, “श्री गोवर्धन गिरधारी”, “हे महाकुंभ दरबार” और “साधु-संतों को मेला है” जैसे गीतों पर श्रोताओं ने खूब तालियां बजाईं। इसके बाद जटाशंकर एवं दल द्वारा प्रस्तुत चोलर लोकनृत्य ने मंच पर लोक परंपरा की जीवंत झलक दिखाई। अगली कड़ी में हरिश्चंद्र पाण्डेय ने “अच्युतम केशवम् राम दामोदरम्” और “अवध में राम आए हैं” जैसे भजनों की सुमधुर प्रस्तुति देकर वातावरण को भक्तिमय बना दिया।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि प्रो. अखिलेश दुबे, अकादमिक निदेशक (महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, क्षेत्रीय केंद्र प्रयागराज) व केंद्र उपनिदेशक डॉ. आदित्य कुमार श्रीवास्तव एवं उपनिदेशक (कार्यक्रम) डॉ. मुकेश उपाध्याय ने सभी कलाकारों को पौधा भेंट कर सम्मानित किया।
इस अवसर पर प्रभारी कार्यक्रम कृष्णमोहन द्विवेदी, कार्यक्रम अधिशाषी मधुकांक मिश्रा व अन्य गणमान्य उपस्थित रहे।










