त्रिभुवन नाथ शर्मा की रिपोर्ट
प्रयागराज। चलो मन गंगा यमुना तीर का हुआ रंगरंग समापन, कलाकारों ने बिखरें कला के रंग। उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र, प्रयागराज, संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार एवं संस्कार भारती के संयुक्त तत्वावधान में एक भारत श्रेष्ठ भारत के तहत आयोजित “चलो मन गंगा–यमुना तीर” कार्यक्रम का रंगारंग समापन शुक्रवार को हुआ। दर्शकों ने देर रात तक सांस्कृतिक आनंद लिया। समापन की संध्या पर मुख्य अतिथि माननीय न्यायमूर्ति सुश्री नंद प्रभा शुक्ला ने कहा कि ऐसे आयोजन कला, संस्कृति और समाज को जोड़ने, संवेदनशील बनाने और सकारात्मक दिशा देने का कार्य करती हैं। जिस प्रकार न्याय व्यवस्था समाज में संतुलन और सामंजस्य स्थापित करती है, उसी प्रकार ऐसे सांस्कृतिक आयोजन भी समाज में एकता, सौहार्द और मानवीय मूल्यों को मजबूत करते हैं।
कार्यक्रम का शुभारंभ सुप्रसिद्ध गायिका निकिता कुशवाहा के भावपूर्ण भजन गायन से हुआ। उन्होंने “चलो मन गंगा यमुना तीर”, “रामजी से पूछे जनकपुर के नारी”, “तेरी मंद मंद मुस्कनिया” एवं “होरी खेले नंद किशोर” जैसे भजनों की सुमधुर प्रस्तुति देकर वातावरण को भक्तिमय बना दिया। इसके पश्चात सुश्री रागिनी श्रीवास्तव द्वारा लोक गायन की मनोहारी प्रस्तुति दी गई। उन्होंने घर में पधारो गजानन जी”, “प्रयाग नगरी बसे संगम के तीरे”, “चित्रकूट के घाट-घाट पर शबरी देखे बाट”, “हम माघ महिनवा में गंगा नहाइब”, “मेरी विनती सुनो सांवरे राम जी” तथा “बम बम बोल रहा है काशी” जैसी प्रस्तुतियों ने दर्शकों को झूमने पर विवश कर दिया।

कार्यक्रम की अगली कड़ी में लोक नाट्य नौटंकी “महाराजा भरथरी” का मंचन किया गया। इस लोकनाट्य के माध्यम से यह संदेश प्रभावी रूप से प्रस्तुत किया गया कि छल और षड्यंत्र चाहे कितना ही प्रबल क्यों न हो, अंततः विजय सत्य की ही होती है। महाराज भरथरी की दास्तान, उनकी सहिष्णु नीति एवं उस युग की भव्यता का सजीव चित्रण दर्शकों को भावविभोर करता रहा। नारी के दो रूप—सतित्व और दुराचरण—का प्रभावी मंचन विशेष आकर्षण रहा।
इसके बाद रेवती रमण चतुर्वेदी द्वारा “चलो रे मन गंगा जमुना तीर”, “दो दिन का जग में मेला” एवं “मैने लीन्हो गोविंद मोल” की प्रस्तुति देकर सांस्कृतिक संध्या को सुरमयी बना दिया। इस अवसर पर केंद्र निदेशक सुदेश शर्मा, कार्यक्रम सलाहकार कल्पना सहाय ने मुख्य अतिथि एवं कलाकारों को पौधा देकर सम्मानित किया। कार्यक्रम का संचालन संजय पुरषार्थी ने किया।










