त्रिभुवन नाथ शर्मा की रिपोर्ट
प्रयागराज। शुआट्स द्वारा कोर्स बंद करने, शिक्षकों की सेवा समाप्त किये जाने को उच्च न्यायालय ने सही पाया, यूनिवर्सिटी को तीन सप्ताह में शासन के समक्ष एक्सप्लेनेशन जमा करने का दिया निर्देश। इलाहाबाद उच्च न्यायालय में दाखिल याचिका 2155/2026 में जारी फैसले दि0 26-02-2026 में उच्च न्यायालय ने पाया कि शुआट्स द्वारा कोर्स बंद करने और पिटीशनर-प्रोफेसर की सेवाओं को खत्म करने के फैसले में कोई गड़बड़ी नहीं है। प्रकरण में राज्य को नया फैसला लेने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने शुआट्स को राज्य के समक्ष अपना एक्सप्लेनेशन या सबमिशन जमा करने के लिए तीन हफ़्ते का समय दिया है तथा इसके बाद, राज्य तीन हफ़्ते के अंदर आखिरी फैसला लेगा।
माननीय उच्च न्यायालय द्वारा शिक्षकों की तुरंत बहाली का कोई ऑर्डर नहीं दिया गया है अपितु प्रकरण में हाई कोर्ट के 13-02-2026 के आदेश में शिक्षकों को यूनिवर्सिटी में आंदोलन/धरना नहीं करने का आदेश दिया था। मा0 उच्च न्यायालय द्वारा यूनिवर्सिटी और राज्य हेतु स्टेट पिटीशनर्स-प्रोफेसर्स के लिए वन टाइम सेटलमेंट/कम्पेनसेशन का विकल्प खुला रखा गया है। यूनिवर्सिटी सभी कानूनी उपायों को अपनाने का अधिकार रखती है। अगर कोई कार्रवाई होती है, तो वह फ़ाइनल नतीजे और संवैधानिक उपायों के खत्म होने के बाद ही शुरू की जाएगी।










