पंडित चेतन जोशी की बांसुरी की मधुर तान और शास्त्रीय संगीत की गूंज के साथ शुरू हुआ ‘विरासत कला उत्सव’।

पंडित चेतन जोशी की बांसुरी की मधुर तान और शास्त्रीय संगीत की गूंज के साथ शुरू हुआ ‘विरासत कला उत्सव’।

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त्रिभुवन नाथ शर्मा की रिपोर्ट

प्रयागराज। पंडित चेतन जोशी की बांसुरी की मधुर तान और शास्त्रीय संगीत की गूंज के साथ शुरू हुआ ‘विरासत कला उत्सव’। बांसुरी की मधुर तान और ध्रुपद की गंभीर सुरलहरियों से शुक्रवार की शाम सांस्कृतिक केंद्र प्रेक्षागृह सुरमयी हो उठा। उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र, संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा आयोजित सात दिवसीय ‘विरासत कला उत्सव’ के पहले दिन अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त बांसुरी वादक पंडित चेतन जोशी और पद्मश्री वसिफुद्दीन डागर की प्रस्तुतियों ने ऐसा जादू बिखेरा कि शास्त्रीय संगीत के रसिक देर तक “वाह-वाह” करते रहे।
कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि माननीय न्यायमूर्ति इलाहाबाद उच्च न्यायालय नंद प्रभा शुक्ला केद्र निदेशक सुदेश शर्मा, कार्यक्रम सलाहकार कल्पना सहाय एवं उपनिदेशक कार्यक्रम डॉ. मुकेश उपाध्याय, पद्मश्री वसिफुद्दीन डागर व चेतन जोशी ने दीप प्रज्वलित करके किया।

केंद्र के निदेशक सुदेश शर्मा ने मुख्य अतिथि को अंगवस्त्र व पौधा देकर सम्मानित किया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि ने कहा कि कला केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं है, बल्कि यह समाज को जोड़ने और हमारी सांस्कृतिक पहचान को सुदृढ़ करने का सशक्त साधन है। संगीत, नृत्य, लोक परंपराएँ और सांस्कृतिक अभिव्यक्तियाँ हमारी सभ्यता और मूल्यों की अमूल्य धरोहर हैं, जिन्हें ऐसे आयोजनों के माध्यम से नई पीढ़ी तक पहुँचाना अत्यंत महत्वपूर्ण है।

इस संगीतमयी शाम की शुरुआत केंद्रीय संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से सम्मानित अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त बांसुरी वादक पंडित चेतन जोशी के बांसुरी वादन से हुई। उन्होंने बांसुरी की धुन का आगाज राग रागेश्वरी में आलाप, जोड़ तथा झाला से किया। इसमें उन्होंने अति मंद्र सप्तक का भी अद्वितीय प्रयोग किया, जिसके लिए उनका नाम कई शोध प्रबंधों में भी आया है। संक्षिप्त आलाप के बाद उन्होंने विलंबित रूपक ताल में एक गत रखी, जिसमें विभित्र प्रकार की लयकारियों का अद्भुत समावेश दिखाई दिया। तीन ताल की मध्य लय की बंदिश ‘झननन बाजे मोरी पायलिया’ तथा बाद में द्रुत लय की स्वरचित बंदिश बजाकर आपने श्रोताओं का मन मोह लिया। अंत में उन्होंने होली के मौसम में हृदय को छूने वाली धुन सुना कर श्रोताओं के स्मृति पटल पर अमिट छाप छोड़ी।

पंडित जोशी के साथ तबले पर इंदौर के वरिष्ठ तबला वादक पंडित मनोज श्रीवासत्व तथा उनके शिष्य रुद्राक्ष श्रीवास्तव ने सधी हुई संगत की। पंडित जोशी को उनके शिष्य तथा पुत्र आंजनेय जोशी की बांसुरी पर सहयोग दिया।

इसके बाद पद्मश्री वसिफुद्दीन डागर ने शास्त्रीय गायन की प्रस्तुति देते हुए राग श्री में चौताल की बंदिश “कुंजन में रचो रास” तथा राग देश में धमार की बंदिश प्रस्तुती दी। वहीं पंडित मोहन श्याम शर्मा ने पखावज वादन से समां बांध दिया। वहीं कार्यक्रम के प्रथम कड़ी में नाट्य निर्देशक अभिषेक शर्मा, चंडीगढ़ ने रंगमंच पर वक्ता के रूप में अपने विचार व्यक्त किया। इस अवसर पर सेवा पर्व के अंतर्गत आयोजित चित्रकला प्रतियोगिता में प्रतिभाग करने वाले प्रयागराज के प्रतिभागियों को पुरस्कार एवं प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया, जिसमें प्रोफेशनल वर्ग में प्रथम पुरस्कार डॉ. अम्बरीश कुमार, द्वतीय पुरस्कार विजेता प्रजापति तथा तृतीय पुरस्कार राजाधिराज सिंह को मिला। कॉलेज संवर्ग में प्रथम पुरस्कार सिद्धार्थ कुमरा सिंह, द्वितीय पुरस्कार भरत तिवारी, तृतीय पुरस्कार खुशी देवी को मिला। वही स्कूल संवर्ग में प्रथम शिखर वर्मा, द्वीतीय पुरस्कार शिवम विश्वकर्मा तथा तृतीय पुरस्कार मृदुल गौतम को प्रदान किया गया। जबकि सांत्वना पुरस्कार आध्या केसरवानी, आदित्य रघुवंशी एवं अंशु उपाध्याय को प्रदान किए गए। कार्यक्रम का संचालन संजय पुरषार्थी ने किया।

AT Samachar
Author: AT Samachar

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