देवेन्द्र कुमार जैन की रिपोर्ट
भोपाल, मध्यप्रदेश। जिलें में मलेरिया, डेंगू, चिकनगुनिया बीमारी के नियंत्रण एवं रोकथाम हेतु की गई कार्रवाई। मलेरिया विभाग द्वारा भोपाल जिले में डेंगू, चिकनगुनिया नियंत्रण के लिए एंटीलार्वा गतिविधियों एवं प्रचार-प्रसार का कार्य निंरतर किया जा रहा है। एम्बेड परियोजना (एन.जी.ओ) के माध्यम से डेंगू चिकनगुनिया बीमारी के नियंत्रण में प्रचार-प्रसार एवं सर्वे में निरंतर सहयोग किया जा रहा है। स्कूलों, कॉलेजों, निजी रहवासी सोसाइटी, मोहल्ला सभा के माध्यम से मलेरिया, डेंगू,चिकनगुनिया के नियंत्रण हेतु कार्यशाला की गई है। मलेरिया, डेंगू, चिकनगुनिया बीमारी के नियंत्रण के लिए 44 टीम का गठन कर 21जोन के अतंर्गत 85 वार्ड में संचालन भोपाल शहर में किया जा रहा है जिनके द्वारा वर्ष 2026 में 1 जनवरी से अब तक 138774 घरों का सर्वे कर 3246 कंटेनरों में लार्वा विनिष्टीकरण का कार्य किया जा चुका है। जहां बुखार के केस मिलते है वहां तत्काल रेपिड किट से मलेरियां की जांच की जाती है डेंगू,चिकनगुनिया के लक्षण मिलने पर जिले में चिन्हित पाँचों सेंटीनल साइट पर मरीज को एलाईजा जॉच हेतु भेजा जाता है।
भोपाल जिले में डेंगू चिकनगुनिया की जांच हेतु 5 सेंटीनल साइट एम्स,जी.एम.सी.,बी.एम.एच.आर.सी., जे.पी. चिकित्सालय, सिविल अस्पताल बैरागढ बनाई गई है जहां पर डेंगू, चिकनगुनिया के संभावित लक्षण पाए जाने पर पांच सेंटीनल साइट पर डेंगू और चिकनगुनिया की जाँच की जाती हहैं डेंगू,चिकनगुनिया के सकारात्मक प्रकरण पाए जाने पर एवं सवेंदनशील क्षेत्रों में एंटीलार्वा एक्टीविटी के साथ मरीज के धर एवं आस-पास फॉगिंग कार्य 4 फॉगिग मशीनों के माध्यम से निंरतर फॉगिंग कार्य किया जा रहा है। भोपाल शहर में निरंतर किये जा रहे जन-जागरूकता अभियान, प्रचार-प्रसार, एंटीलार्वा एक्टीविटी के माध्यम से डेंगू,चिकनगुनिया के सकारात्मक प्रकरणों में वर्ष दर वर्ष निरंतर कमी पाई जा रही है।
इस वर्ष 2026 में जनवरी से अब तक कुल मलेरिया जांच 43617 पॉजीटिव 3, डेंगू जांच 1220 पॉजीटिव 18, चिकनगुनिया 282 पॉजीटिव 2 प्रकरण पाये गये है, जबकि पिछले वर्ष 2025 में जनवरी से लेकर 11 अप्रैल 2025 तक 27 डेंगू 38 चिकनगुनिया के सकारात्मक प्रकरण पाये गए थे मलेरिया विभाग द्वारा एवं नगर निगम के माध्यम से जलभराव वाले स्थान चिन्हित कर स्थाई एवं अस्थाई स्त्रोतो में 1 जनवरी 2026 से अब तक लगभग 30000 गंबूशिया मछली का वितरण संचयन किया जा चचुका है ।










