त्रिभुवन नाथ शर्मा की रिपोर्ट
प्रयागराज। नन्हे कलाकारों ने बिखेरे प्रतिभा के रंग, ग्रीष्मकालीन बाल कार्यशाला का हुआ भव्य समापन। गीतों की मधुर स्वर लहरियां, तबले की थाप, शास्त्रीय नृत्य की मनमोहक मुद्राएं, डांडिया-गरबा की रंगत और नन्हे कलाकारों की अद्भुत रचनात्मकता. कुछ ऐसा ही मनोरम दृश्य सोमवार को उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र (एनसीजेडसीसी) के प्रेक्षागृह में देखने को मिला। अवसर था उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र, संस्कृति मंत्रालय,भारत सरकार द्वारा आयोजित 15 दिवसीय ग्रीष्मकालीन प्रस्तुतिपरक बाल कार्यशाला के भव्य समापन समारोह का, जहां बच्चों ने मंच पर अपनी प्रतिभा का ऐसा रंग बिखेरा कि पूरा सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। चित्रकला प्रदर्शनी से लेकर लोकगीत, शास्त्रीय नृत्य, वादन, डांडिया और गरबा की प्रस्तुतियों ने दर्शकों को भारतीय कला एवं संस्कृति की विविध रंगों से सराबोर कर दिया।
कार्यक्रम का उद्घाटन मुख्य अतिथि प्रो. राम प्यारे, सदस्य उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग, प्रयागराज केंद्र निदेशक सुदेश शर्मा, उपनिदेशक डॉ. मुकेश उपाध्याय एवं कार्यक्रम सलाहकार कल्पना सहाय ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। सांस्कृतिक प्रस्तुतियों की शुरुआत प्रशिक्षक अंकुर श्रीवास्तव द्वारा प्रशिक्षित बच्चों के लोकगीत गायन से हुई। बच्चों ने “जगदम्बा घर में दियार बार अइनी हैं”, “बरसन लागी सावन बूदियां”, “पिया बिन लागे न मोरी अखियां”, “रेलिया बैरन पिया को लिए जाए रे”, “मोरे राम अवध घर आए” तथा “चार महिनवां गर्मी पड़ें” जैसे लोकगीतों की प्रस्तुति देकर श्रोताओं की खूब वाहवाही बटोरी। इसके पश्चात डॉ. अनुपम गुप्ता द्वारा प्रशिक्षित बच्चों ने “एरी सखी मंगल गाओ री” गीत पर तबला वादन में तीनताल की प्रभावशाली प्रस्तुति दी। कथक प्रशिक्षिका डॉ. अनु सिन्हा के निर्देशन में बच्चों ने गणेश वंदना एवं विष्णु वंदना पर आधारित कथक नृत्य प्रस्तुत किया, जबकि उर्वशी जेतली के निर्देशन में भरतनाट्यम की मनोहारी प्रस्तुति ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
डांडिया एवं गरबा प्रशिक्षिका सोनाली चक्रवर्ती के निर्देशन में बच्चों एवं युवाओं ने “हे रंगीलो जमे कालिंद नीरे रात”, “छोगाड़ो तारो”, “ओ रे रंगीलो तारो” गीतों पर डांडिया नृत्य तथा “ढोलीड़ा ढोल रे बजा”, “मारे हिचले से” और “रंग ताली, रंग ताली, रंग ताली मां अंबे रंग ताली” जैसे लोकप्रिय गीतों पर गरबा नृत्य प्रस्तुत कर सभागार को उत्साह और उमंग से भर दिया।
चित्रकला प्रदर्शनी बनी आकर्षण का केंद्र।

समापन समारोह के अवसर पर महात्मा गांधी कला वीथिका में प्रशिक्षिका प्रतिभा पाण्डेय के निर्देशन में बच्चों द्वारा तैयार चित्रों और कलाकृतियों की प्रदर्शनी “कल्प तरंग : नन्हें मन, अनंत संसार” का आयोजन किया गया। मुख्य अतिथि एवं अन्य गणमान्य अतिथियों ने प्रदर्शनी का अवलोकन कर बच्चों की रचनात्मकता और कलात्मक अभिव्यक्ति की सराहना की।
प्रदर्शनी में पर्यावरण संरक्षण, प्राकृतिक रंगों, लोककलाओं, मानवीय संवेदनाओं, समुद्र मंथन, वर्ली, गोंड एवं पट्टचित्र कला सहित विविध विषयों पर आधारित चित्र प्रदर्शित किए गए। साथ ही वेस्ट मटेरियल से तैयार कलाकृतियां, कैनवास पेंटिंग, मिट्टी शिल्प एवं हस्तनिर्मित वस्तुओं ने दर्शकों का विशेष ध्यान आकर्षित किया। कार्यशाला के दौरान बच्चों को ड्राइंग-पेंटिंग, क्राफ्ट, मिट्टी शिल्प, वेस्ट मटेरियल से उपयोगी वस्तुओं का निर्माण तथा योग गतिविधियों का प्रशिक्षण दिया गया, जिसका उत्कृष्ट परिणाम प्रदर्शनी में देखने को मिला।
कार्यक्रम के अंत में मुख्य अतिथि एवं केंद्र निदेशक ने प्रशिक्षकों को प्रमाण-पत्र, अंगवस्त्र व पौधा देकर सम्मानित किया।
इस अवसर पर केंद्र के समस्त अधिकारी एवं कर्मचारी सहित काफी संख्या में शहर के गणमान्य उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन आकाश अग्रवाल ने किया।










