मानव सेवा से बढ़कर कोई धर्म नहीं है… अध्यक्ष
करारी/कौशांबी। स्वर्णकार शिवालय सेवा ट्रस्ट द्वारा राहगीरों को किया गया शरबत वितरण, भीषण गर्मी में लोगों को मिली राहत। पड़ रही भीषण गर्मी और तेज धूप के बीच श्री स्वर्णकार शिवालय सेवा ट्रस्ट द्वारा मानव सेवा की अनूठी मिसाल पेश करते हुए राहगीरों, श्रमिकों, वाहन चालकों एवं आम नागरिकों को शीतल शरबत वितरित किया गया। ट्रस्ट के इस सेवा कार्य को लोगों ने खूब सराहा और इसे समाज के लिए प्रेरणादायक पहल बताया।
शरबत वितरण कार्यक्रम का आयोजन नगर के व्यस्त मार्ग पर किया गया, जहां दिनभर बड़ी संख्या में आने-जाने वाले लोगों को ठंडा और स्वादिष्ट शरबत पिलाया गया। भीषण गर्मी से परेशान राहगीरों ने शरबत ग्रहण कर राहत महसूस की और ट्रस्ट के सदस्यों का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम के दौरान सेवा भावना और जनकल्याण का संदेश भी दिया गया।ट्रस्ट के अध्यक्ष श्याम किशोर वर्मा ने कहा कि मानव सेवा से बढ़कर कोई धर्म नहीं है। गर्मी के मौसम में लोगों को राहत पहुंचाने के उद्देश्य से यह आयोजन किया गया है। उन्होंने बताया कि संस्था समय-समय पर सामाजिक एवं धार्मिक कार्यों में बढ़-चढ़कर भाग लेती रही है तथा आगे भी जनहित के कार्य निरंतर जारी रहेंगे।
कार्यक्रम में ट्रस्ट के सदस्यों ने पूरे उत्साह और समर्पण के साथ राहगीरों को शरबत वितरित किया। इस दौरान लोगों को गर्मी से बचाव के उपायों की जानकारी भी दी गई। राहगीरों ने कहा कि ऐसी सेवाएं समाज में आपसी सहयोग, भाईचारे और मानवता की भावना को मजबूत करती हैं।श्री स्वर्णकार शिवालय सेवा ट्रस्ट की इस सराहनीय पहल ने न केवल लोगों को गर्मी से राहत पहुंचाई, बल्कि समाज में सेवा, सहयोग और परोपकार का भी संदेश दिया। कार्यक्रम के अंत में ट्रस्ट के पदाधिकारियों ने सभी सहयोगियों का आभार व्यक्त करते हुए भविष्य में भी इसी प्रकार के जनसेवा कार्य जारी रखने का संकल्प लिया।
इस दौरान सचिन शुक्ला, विजय कृष्ण वर्मा, गोपाल जी स्वर्णकार, प्रितम सिंह, सतीश कुमार, पराग , काली चरण मिश्र, वरुण त्रिपाठी, जयकरन गौतम, जे के त्रिपाठी विनोद कुमार, धर्म चंद्र गौतम, हिमांशु स्वर्णकार, अरुण विश्वकर्मा, सत्यानंद सोनी प्रेम चंद्र विश्वकर्मा शिवांश सोनी, शैलेन्द्र गुप्ता, अम्बुज सिंह, कमलेश मिश्र, मक्खन पाल, अरुण विश्वकर्मा, सुशील मिश्रा, प्रेमचंद विश्वकर्मा, शूले राजपूत, दुर्गा प्रसाद वर्मा नित्यानंद सोनी आदि उपस्थित रहे।










