लखीसराय, बिहार। समाजसेवी स्व0 बुद्धदेव आर्य के पुण्य स्मृति तथा विश्व मरुस्थलीकरण एवं सूखा दिवस पर पर्यावरण भारती द्वारा देव वृक्ष लगयेगये। जिसमे पीपल के 3,पाकड़ के 1और तुलसी के 1 पौधे लगाए गए। पौधारोपण का नेतृत्व लखीसराय जिला संयोजक उदय कुमार रजक ने किया। सहयोग रूपेश कुमार तथा प्रशांत कुमार यदुवंशी का प्राप्त हुआ।
पर्यावरण भारती के संस्थापक, पर्यावरण संरक्षण गतिविधि प्रांत संयोजक एवं अखिल भारतीय पेड़ उपक्रम टोली सदस्य राम बिलास शाण्डिल्य ने कहा कि स्व0 बुद्धदेव आर्य जी समाजसेवी थे। वे अपने समाज के 17 पुर के अध्यक्ष थे। उनको 5 पुत्र शंकर प्रसाद आर्य, ओम प्रकाश आर्य, हरि प्रसाद आर्य, भोपाल प्रसाद आर्य, दीनदयाल आर्य और 2 पुत्रियाँ स्व0 गायत्री देवी तथा सुशीला देवी हैं। स्व0 बुद्धदेव आर्य जी राष्ट्रभक्त ,कर्त्तव्यनिष्ट एवं ध्येयनिष्ठ थे। वे हम सबों के प्रेरणास्रोत थे। ऐसे महानुभाव के पुण्य स्मरण में पौधारोपण स्मरणीय कार्य है।
शाण्डिल्य ने बताया कि 17 जून 1994 को पहली बार संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा विश्व मरुस्थलीकरण और सूखा दिवस मनाया गया। इसका उद्देश्य है–“मरुस्थलीकरण, भूमि क्षरण और सूखे के प्रति संसार में जागरूकता बढ़ाना तथा इसके समाधान हेतु प्रेरित करना है”। इसके बचाव हेतु सरकार, संस्थायें और आम नागरिक मिलकर वृक्षारोपण अभियान चलायें। जलाशय की सुरक्षा करें। अंधाधुंध पेड़ों की कटाई से पर्यावरण संकट दिखाई देने लगा है।
ग्लोबल वार्मिंग से मानव जीवन परेशान है। किसान बर्षा हेतु आकाश की ओर टकटकी लगाये हुए हैं। धान की बिचरी के लिए बर्षा का होना अनिवार्य है। सरकार ड्रिप सिंचाई को बढ़ावा दे रही है। 1962 में भारत सरकार ने पहला सिंचाई आयोग बनाया। इसके बाद भारत में हरित क्रांति आयी। अनाज के मामले में देश आत्मनिर्भर हुआ। इसके पहले 1899 में देश में सुखाड़ और अकाल का भयानक रूप देखा गया था। ऐसे सुअवसर पर पौधारोपण महत्वपूर्ण कार्य है।
पर्यावरण भारती के पौधारोपण में रमेश कुमार, पुष्पेन्द्र कुमार, केशव यदुवंशी, उदय रजक, प्रशांत कुमार यदुवंशी, बबलू कुमार, रूपेश कुमार,राम बिलास शाण्डिल्य बाल्मीकि मोदी, विक्रम प्रसाद इत्यादि ने भाग लिए।










