गुरु के बिना संगीत की साधना अधूरी – संगीता राय। 

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त्रिभुवन नाथ शर्मा की रिपोर्ट

प्रयागराज। गुरु के बिना संगीत की साधना अधूरी – संगीता राय। उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र, संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार की ओर से मंगलवार को केंद्र परिसर के बहुउद्देशीय हॉल में संवाद श्रृंखला ‘विमर्श’ का आयोजन किया गया। इसमें मुख्य वक्ता के रूप में सुप्रसिद्ध गायिका संगीता राय ने संगीत की परंपरा, साधना और गुरु-शिष्य संबंधों पर अपने विचार रखे।

उन्होंने कहा कि संगीत एक योग साधना है। इसे सीखने के लिए गुरु का मार्गदर्शन, नियमित रियाज और समर्पण जरूरी है। उन्होंने कहा कि आजकल युवा यूट्यूब के माध्यम से संगीत सीखने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन यह वास्तविक संगीत शिक्षा का विकल्प नहीं हो सकता। संगीत के सात स्वरों को सही ढंग से साधने के लिए वर्षों की मेहनत और गुरु का सान्निध्य आवश्यक होता इसलिए गुरु के बिना संगीत की साधना अधूरी है।


संगीता राय ने कहा कि गायन की कई विधाएं हैं, जिनमें शास्त्रीय संगीत सबसे कठिन माना जाता है। उन्होंने बताया कि उनके मार्गदर्शन में सैकड़ों विद्यार्थी गुरु-शिष्य परंपरा के तहत संगीत की शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। उन्होंने लोक संगीत और शास्त्रीय संगीत की उत्पत्ति, विकास तथा भारतीय संस्कृति में उनके महत्व पर भी विस्तार से चर्चा की।
प्रयागराज की रहने वाली संगीता राय आकाशवाणी और दूरदर्शन की लोक संगीत में टॉप ग्रेड तथा सुगम संगीत में ए ग्रेड की अनुमोदित कलाकार हैं। उन्होंने संगीत की प्रारंभिक शिक्षा अपनी माता से प्राप्त की। इसके बाद ग्वालियर घराने के स्वर्गीय पंडित नारायण लक्ष्मण गुने से शास्त्रीय संगीत और स्वर्गीय पंडित युक्त भद्र दीक्षित से लोक संगीत की शिक्षा ग्रहण की है।


कार्यक्रम का शुभारंभ उपनिदेशक डॉ. मुकेश उपाध्याय, कार्यक्रम सलाहकार कल्पना सहाय और मुख्य वक्ता संगीता राय ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इस अवसर पर डॉ. कृष्णानंद पाण्डेय, वरिष्ठ रंगकर्मी अभिलाष नारायण, प्रभारी कार्यक्रम कृष्णमोहन द्विवेदी एवं श्रोता उपस्थित रहे।

AT Samachar
Author: AT Samachar

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