डर्मोस्कोपी पर सीएमई आयोजित, त्वचा रोगों की पहचान व इलाज में आधुनिक तकनीक पर विशेषज्ञों ने दी जानकारी

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ATS रिपोर्टर देवेन्द्र कुमार जैन भोपाल मध्यप्रदेश

एम्स भोपाल के त्वचा रोग विभाग ने “दैनिक चिकित्सा अभ्यास में डर्मोस्कोपी” विषय पर सतत चिकित्सा शिक्षा कार्यक्रम आयोजित किया, जिसमें करीब 100 चिकित्सकों और चिकित्सा विद्यार्थियों ने भाग लिया। विशेषज्ञों ने बताया कि डर्मोस्कोपी की मदद से त्वचा के उन छोटे बदलावों को भी करीब से देखा जा सकता है, जो सामान्य आंखों से आसानी से दिखाई नहीं देते। इससे त्वचा रोगों की पहचान और उपचार की योजना बनाने में मदद मिलती है। कार्यक्रम में त्वचा पर अधिक या कम रंगत, सूजन वाले रोग, नाखूनों की समस्याएं, बाल झड़ने की अलग-अलग स्थितियां तथा कैंसर से पहले और कैंसरकारी त्वचा रोगों की पहचान में डर्मोस्कोपी के उपयोग पर चर्चा हुई। डॉ. पायल चौहान, डॉ. सौमिल खरे और डॉ. क्रति दीवान ने विशेषज्ञ व्याख्यान दिए। “दैनिक चिकित्सा अभ्यास में डर्मोस्कोपी का समावेशन” विषय पर विशेषज्ञ पैनल चर्चा भी हुई। कार्यक्रम का उद्घाटन प्रोफेसर डॉ. रजनीश जोशी (डीन एकेडमिक्स, एम्स भोपाल) और डॉ. नितिन पंड्या (अध्यक्ष, आईएडीवीएल मध्य प्रदेश स्टेट ब्रांच) ने किया। डॉ. प्रशंसा जायसवाल (आयोजन अध्यक्ष) और डॉ. मनीष खंडारे (आयोजन सचिव) ने कार्यक्रम का नेतृत्व किया।

 

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