लोककथाओं का जीवंत मंचन, ‘कहानियां कहती कहानी’ ने छुआ दर्शकों का मन।

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नाट्य समारोह के चौथे दिन समन्वय रंगमंडल की प्रस्तुति को मिली सराहना

 

त्रिभुवन नाथ शर्मा की रिपोर्ट

 

प्रयागराज। तालियों की गड़गड़ाहट के बीच परदा उठता है और शुरू होता है कलाकारों का डायलॉग अवसर था नाट्य समारोह का। उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र, संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार की ओर से आयोजित 6 दिवसीय नाट्य समारोह के अंतर्गत समन्वय रंगमंडल द्वारा सोमवार को सुषमा शर्मा के निर्देशन में नाटक कहानियां कहती कहानी का मंचन केन्द्र प्रेक्षागृह में किया गया। यह नाटक छह लोक कथाओं पर आधारित है। नाटक चाभी की खोज से शुरू होकर फुर्र पर समाप्त होता है। कहानियाँ कहती कहानी‘ 6 छोटी-छोटी लोक कथाओं का एक कोलाज है यह कहानी तमिल, तेलुगू, गोंडी साहित्य और मराठी लोक साहित्य में ली गई है। यह कहानी श्रोताओं से अथवा दर्शकों से बातचीत करती दिखाई देती है। कहानियां लोगों से गुहार लगाती दिखीं कि आधुनिकता के चलते पल-पल बदलते युग में उन्हें सुरक्षित और अगली पीढ़ी को हस्तांतरित किया जाए।

कहानियां सुरक्षित रहेंगी तो नई पीढ़ी भी उनसे अनभिज्ञ नहीं रहेगी। चाभी की खोज अनकही कहानी दीवारों से कहो, नाई का रहस्य आदि ने दर्शकों का खूब मनोरंजन किया। बूढ़ी मां के रोल में मीना उरांव के अभिनय को दर्शकों ने खूब सराहा, अभिनव उपाध्याय, विजय कुमार, अर्नव राय, शांता सिंह, राहुल यादव, सलोनी उरांव ने शानदार अभिनय किया। प्रकाश संचालन पवन सिंह मंच निर्माण विजय कुमार, अभिषेक ने किया।

प्रभारी कार्यक्रम एम.एम. मणि ने कलाकारों को स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया। कार्यक्रम का संचालन मधुकांक मिश्रा ने किया। इस अवसर पर केंद्र के समस्त अधिकारी, कर्मचारी सहित काफी संख्या में दर्शक मौजूद रहे।

नाट्य समारोह की अगली कड़ी में मंगलवार को नाटक ‘श्वान गान’ का मंचन किया जाएगा।

AT Samachar
Author: AT Samachar

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