त्रिभुवन नाथ शर्मा की रिपोर्ट
प्रयागराज। भूमि सुधार कानून के अंतर्गत भूमिहीन खेतिहर मजदूरों को भूमि आवंटन के संबंध में डा. अम्बेडकर वेलफेयर नेटवर्क (डान) के संस्थापक उच्च न्यायालय के अधिवक्ता आईपी रामबृज विगत एक दशक (2011) से यमुनापार की तहसील बारा, करछना, मेजा और कोरांव में भूमिहीनों में आवासीय और कृषि कार्य के पट्टे करवाने के लिए संघर्षरत है। बता दें कि आईपी रामबृज अपने आंदोलन के माध्यम से शंकरगढ़ विकासखण्ड की ग्रामसभा जूही कोठी में बत्तीस बीघे और विकास खण्ड जसरा स्थित ग्रामसभा कूड़ी गौहानी में बारह बीघा ग्रामसमाज की जमीनें भूमाफियाओं से मुक्त करवाकर भूमिहीनों में आवंटित करवाने का कार्य किये है।
आईपी रामबृज का कहना है की वर्तमान भाजपा सरकार का श्लोगन सबका साथ और सबका विकास के साथ वर्तमान सरकार में दलितों का विकास कैसे हो सकता है के बावत काम करवाने की अपेक्षा है। देश की आजादी के अठहत्तर साल बाद भी गांवों में बसे हुये अस्सी प्रतिशत अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति तथा ऐसे अन्य पिछड़े वर्ग के साथ साथ सामान्य वर्ग के ऐसे लोग जिनके पास अपनी खुद की इतनी भी जमीन नहीं है कि वे अपने घर के अगवारे और पिछवाड़े साग-सब्जी उगा सके। यदि उनके बच्चे किसी बीमारी से मर जायें तो उनको दफनाने के लिये उनके पास जगीन नहीं है। कहीं नहरा के किनारे, कहीं बहरा के किनारे या नदी के किनारे मृत लाश को दफनाने का काम करते हैं। संविधान शिल्पी डॉक्टर अम्बेडकर के निदेर्शानुसार यदि कृषि और उद्योगों का राष्ट्रीयकरण कर दिया जाए तो उक्त दोनों उत्पादन के साधनों से उत्पादन बढ़ता है जिसका मालिक राज्य है और संविधान के नीति निर्देशक योजना के अनुसार भी जमीनों का आवंटन मूलभूत भूमि सुधार कानून लंबे समय से लंबित है।
उत्तर प्रदेश भर में अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति तथा अन्य पिछड़े वर्ग के साथ साथ सामान्य वर्ग के भी भूमिहीन खेतिहर मजदूरों की दयनीय दशा बढ़ गई है। क्योंकि कृषि जगत में कल कारखानों के उपकरणों के इस्तेमाल तथा बैलों द्वारा कृषि कार्य समाप्त होने की वजह से मूमिहीन कृषक मजदूर बेरोजगार हो गए हैं, जिससे उनकी रोजी-रोटी का साधन भी छिन गया है और वह गरीबी से बढ़कर कंगाल की श्रेणी में आ गए है। उनके पास उत्पादन का साधन तथा बेरोजगारी मिटाने का कोई उपाय नहीं है। ऐसी स्थिति में भूमि सुधार कानून के तहत सूबे स्तर पर ग्रामसमा की ऊसर, बंजर, परती व सरकारी तथा समाज कल्याण विभाग द्वारा क्रय की गई भूमि व सीलिंग से घोषित अतिरिक्त तथा बेनामी जमीनों को पूर्व मुख्यमंत्री बसपा प्रमुख सुश्री मायावती जी की मांति अभियान चलाकर अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति तथा अन्य पिछड़े वर्ग के साथ साथ सामान्य वर्ग के भूमिहीन खेतिहर मजदूरों में भूमि आवंटित करने की सख्त जरूरत है। यह काम सरकारी स्तर से बहुत लंबे समय से लंबित है। आश्चर्य की दूसरी बात तो यह भी है की अनुसूचित जाति /अनुसूचित जनजाति की पुरानी पुश्तैनी आबादी वाली भूमि मौके के अनुसार आबादी में दर्ज हो ही नहीं रही है। लेखपाल मौके के आधार पर फसली वर्षों में अनुसूचित जाति की अवादी दर्ज ही नहीं करते जिसका लाभ उठाकर पुलिस प्रशासन तथा राजस्व विभाग की लचर व्यवस्था के कारण क्षेत्रीय गुण्डे, भू-माफिया उन्हें उजाड़ कर बेघर कर दे रहे हैं।
वर्तमान में खेतों में रोपी जाने वाली धान की फसल के पूर्व या कहे धान की रोपाई के उपरांत धान की फसल की कटाई के तत्काल बाद भूमिहीन मजदूरों में यदि अभियान चलाकर कृषि कार्य का व आवासीय पट्टा अर्थात भूमिहीन मजदूरों में भूमि आवंटन के लिये विशेष अभियान चलाया जाय।










