रामपुर में चाइनीस माजे पर कार्रवाई सिर्फ दिखावा?

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छोटी दुकानों पर छापे, बड़ी फैक्ट्रियां पुलिस की पकड़ से बाहर

मंडल प्रभारी अवनीत कुमार शर्मा की रिपोर्ट

रामपुर। रामपुर में चाइनीस माजे पर कार्रवाई सिर्फ दिखावा? थाना गंज क्षेत्र में थानागंज प्रभारी पवन शर्मा ने अपने पुलिस बल के साथ पतंग विक्रेताओं की दुकानों पर चेकिंग अभियान चलाया। यह कार्रवाई चाइनीस माजे को लेकर की गई, जो बीते समय में रामपुर में कई लोगों के लिए जानलेवा साबित हो चुका है।

चाइनीस माजे से अब तक मोटरसाइकिल सवारों की गर्दन, नाक, यहां तक कि मासूम बच्चों की गर्दनें भी कट चुकी हैं। कई लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं, फिर भी यह प्रतिबंधित माजा बाजारों तक कैसे पहुंच रहा है, यह बड़ा सवाल बना हुआ है।

पुलिस जहां एक ओर सख्ती का दावा कर रही है, वहीं दूसरी ओर कार्रवाई केवल छोटे दुकानदारों तक ही सीमित नजर आ रही है। सवाल यह उठता है कि चाइनीस माजे की सप्लाई आखिर हो कहां से रही है?

जब माजा फैक्ट्रियों में बन रहा है, तो उन फैक्ट्रियों पर कार्रवाई क्यों नहीं? स्थानीय लोगों का कहना है कि चाइनीस माजा बड़ी फैक्ट्रियों में तैयार होकर शहरों, देहात और जिलों तक पहुंचाया जा रहा है। इसके बावजूद पुलिस का शिकंजा केवल फुटकर विक्रेताओं पर ही क्यों कसा जा रहा है?

क्या बड़ी फैक्ट्रियों पर हाथ डालने से पुलिस डर रही है?

या फिर कहीं ऐसा तो नहीं कि इन फैक्ट्रियों के तार प्रभावशाली लोगों और राजनेताओं से जुड़े हुए हैं? यह भी सवाल उठ रहा है कि उत्तर प्रदेश पुलिस, जिसकी शक्ति और कार्रवाई के दावे अक्सर गिनाए जाते हैं, आखिर “बड़ी मछलियों” को पकड़ने से क्यों बच रही है? यदि सच में शासन-प्रशासन चाइनीस माजे को लेकर गंभीर है, तो फैक्ट्रियों पर छापेमारी उन्हें सील करने की कार्रवाई, मालिकों पर कठोर कानूनी कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही?

यह पूरा मामला अब केवल कानून व्यवस्था का नहीं, बल्कि संभावित राजनीतिक संरक्षण और प्रशासनिक लापरवाही की जांच का विषय बन चुका है।

जब तक चाइनीस माजे की उत्पत्ति के स्रोत पर वार नहीं होगा, तब तक ऐसी छापेमारी सिर्फ औपचारिकता ही मानी जाएगी।

अब देखना यह है कि शासन-प्रशासन इस गंभीर मुद्दे पर सिर्फ दिखावटी कार्रवाई करता है या फिर वास्तव में जानलेवा चाइनीस माजे के कारोबार की जड़ पर प्रहार करता है।

*जिलों तक पहुंचाया जा रहा है। इसके बावजूद पुलिस का शिकंजा केवल फुटकर विक्रेताओं पर ही क्यों कसा जा रहा है?

क्या बड़ी फैक्ट्रियों पर हाथ डालने से पुलिस डर रही है? या फिर कहीं ऐसा तो नहीं कि इन फैक्ट्रियों के तार प्रभावशाली लोगों और राजनेताओं से जुड़े हुए हैं?
यह भी सवाल उठ रहा है कि उत्तर प्रदेश पुलिस, जिसकी शक्ति और कार्रवाई के दावे अक्सर गिनाए जाते हैं, आखिर “बड़ी मछलियों” को पकड़ने से क्यों बच रही है? यदि सच में शासन-प्रशासन चाइनीस माजे को लेकर गंभीर है, तोफैक्ट्रियों पर छापेमारी
उन्हें सील करने की कार्रवाई, मालिकों पर कठोर कानूनी कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही? यह पूरा मामला अब केवल कानून व्यवस्था का नहीं, बल्कि संभावित राजनीतिक संरक्षण और प्रशासनिक लापरवाही की जांच का विषय बन चुका है।

जब तक चाइनीस माजे की उत्पत्ति के स्रोत पर वार नहीं होगा, तब तक ऐसी छापेमारी सिर्फ औपचारिकता ही मानी जाएगी।

अब देखना यह है कि शासन-प्रशासन इस गंभीर मुद्दे पर सिर्फ दिखावटी कार्रवाई करता है या फिर वास्तव में जानलेवा चाइनीस माजे के कारोबार की जड़ पर प्रहार करता है।

AT Samachar
Author: AT Samachar

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