प्रयागराज। बहुजन समाज पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव मेवालाल गौतम के स्वार्थ के कारण ही पार्टी का गिरता वोट प्रतिशत और राजनीतिक जनाधार दुखद व चिंतनीय है। चुनाव के समय यह सब और भी अधिक विषैला व हिंसक हो जाता है। अभी बिहार में भी जो कुछ देखने व सुनने को मिला है वह पार्टी की चिंता को बढ़ाने वाला है।

डा. अम्बेडकर वेलफेयर नेटवर्क (डान) के संस्थापक उच्च न्यायालय के अधिवक्ता आईपी रामबृज ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर बताया कि सभी पार्टियों की राजनीति करोड़ों गरीबों व आमजन के हित में होनी चाहिये जो बीएसपी में पिछले 2012 से सही से देखने को नहीं मिल रही है। देश की आंतरिक एवं बाहरी चुनौतियां बढ़ी हैं। उच्च सरकारी, गैर-सरकारी संस्थाओं व राजनीति में उच्च पदों पर बैठे लोगों के बारे में जिस प्रकार की अभद्र, अशोभनीय, अमर्यादित व असंसदीय टिप्पणी आदि सार्वजनिक तौर पर करके उनकी व देश की छवि को धूमिल करने के जो प्रयास किये जा रहे हैं, वह दुखद व चिंतनीय हैं। बसपा शुरू से ही सर्वजन हिताय व सर्वजन सुखाय के अम्बेडकरवादी सिद्धांत और नीति पर चलती रही है और किसी भी प्रकार की दूषित व जहरीली राजनीति के खिलाफ है किन्तु बीएसपी के राष्ट्रीय महासचिव मेवालाल गौतम उत्तर प्रदेश ही नहीं पूरे देश में बीएसपी के अन्दर गुटबाजी पैदा कर दी है जिससे वास्तव में सही कार्यकर्ताओं को पार्टी में पदाधिकारी न बनकर मेवालाल गौतम की जी हजूरी और उनकी चाटुकारिता कर सकता है।
वही जिले का जिलाध्यक्ष और मुख्य मण्डल प्रभारी बन सकता है। राष्ट्रीय महासचिव की दलाली और चाटुकारिता से बगावत करने वालों का पहले पद लिया जाता है उसके बाद उसे पार्टी से निकाल दिया जाता है। मिशन मूवमैंट पर काम करने वाले कार्यकर्ताओं को मेवालाल गौतम द्वारा किया जा रहा ऐसा कृत्य नागवार लगता है किन्तु ऐसे लोग कर ही क्या सकते है। पूछे जाने पर आईपी रामबृज ने बताया कि देश का एक आम नगरी यदि अपने देश के प्रधानमंत्री से मिलना चाहे तो मिल सकता है। कांग्रेस के राहुल, सोनिया या प्रियंका गांधी से मिलना चाहे तो मिल सकता है। समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव से मिलना चाहे तो मिल सकता है किन्तु बीएसपी प्रमुख मायावती से वही मिल सकता है जिसका जेब मजबूत हो यानि बीएसपी रूपी मन्दिर में मायावती रूपी जीवित देवी से दर्शन हेतु चढ़ावा के बगैर दर्शन मुश्किल ही नहीं असंभव है।
बीएसपी रूपी मन्दिर का पंडा रूपी मेवालाल गौतम हर कार्य सम्भव करा सकता है बशर्ते उसके जेब भरने के लिए चढ़ावा के अलावा किसी के पास अतिरिक्त अर्थ होना चाहिए। बीएसपी के शुभचिंतक कार्यकर्ता विगत छः महीनों से बीच बीच में मेवालाल गौतम विरोधी पोस्ट सोशल मीडिया पर और जमीन पर मुर्दाबाद के नारे, पुतला दहन के रूप में विरोध देखे जा रहे है। बीएसपी प्रमुख मेवालाल गौतम पर कितनी जल्दी कार्यवाही करेंगी ये वक्त बताएगा। सूत्रों का कहना है की मायावती जब अपने समधी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव डा. अशोक सिद्धार्थ की नहीं हुई तो मेवालाल गौतम किस खेत की मूली है।










