डा.अम्बेडकर ने कहा था दस भाषण सुनने से ज्यादा प्रभावशाली होता है एक नाटक देखना।

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कारगर साबित होगा पच्चासी प्रतिशत बहुजनों के ध्रुवीकरण में नाटक बेटी की प्रस्तुति

त्रिभुवन नाथ शर्मा की रिपोर्ट

प्रयागराज। देश की आजादी के 78 और संविधान लागू होने के 74 साल बाद भी व्यवस्था परिवर्तन के लिए जो कार्य होने चाहिये थे वो कार्य मिशन मूवमेंट पर आधारित नहीं हो सके ? बहुजन समाज के बौद्धिक वर्ग को इसके लिये कितना समय और चाहिए ? क्या कहीं ऐसा तो नही हो रहा है कि व्यवस्था परिवर्तन की बात करने वाला बहुजन समाज का बौद्धिक वर्ग अपने निजी स्वार्थ में जिस व्यवस्था में परिवर्तन करना था उसी व्यवस्था के साथ लगकर अपना उल्लू सीधा कर रहा है ? व्यवस्था परिवर्तन के लिये सितम्बर का माह पेरियार माह होता है पेरियार साहब की जन्म दिवस की 146 वीं वर्षगांठ पर व्यवस्था परिवर्तन के लिए एक संकल्प जरूरी है। संकल्पित होकर मान, सम्मान और स्वाभिमान में प्रथम पायदान मान यानि हर बौद्धिक वर्ग बहुजन समाज के जीवन मूल्यों के स्वरूप पर चर्चा करे, बहुजन समाज को अपनी पहचान पर ध्यान देना होगा। पर्व, परम्परा, प्रतीक पर कार्य करना होगा, जिस परंपरा में बहुजन समाज जकड़ा हुआ है उस परंपरा में दरिद्रता छिपी हुई है। बहुजन समाज को उस परंपरा को छोड़ना होगा और जन्म से मृत्यु तक अपनी वैज्ञानिकता पर आधारित परंपरा गढ़नी होगी। बहुजन समाज की मुक्ति के लिये बौद्धिक वर्ग को त्याग करना होगा, विना त्याग के कुछ भी सम्भव नहीं है, त्याग व्यवस्था परिवर्तन का बड़ा लक्ष्य है ? व्यवस्था परिवर्तन का एक माध्यम है सांस्कृतिक जागरण। प्रबुद्ध फाउंडेशन के प्रबंधक / सचिव उच्च न्यायालय के अधिवक्ता रंगकर्मी, रंग निर्देशक आईपी रामबृज बहुजन समाज के साहित्य, कला और संस्कृति के साथ बहुजन रंगमंच के संरक्षण, सम्बर्धन और उसके विकास के साथ साथ उसके पुनर्स्थापत्य के लिये शहर की मलिन बस्तियों से लेकर गांवों में स्थित बहुजन बाहुल्य बस्तियो में सतत कार्य कर रहे है। व्यवस्था परिवर्तन के लिये समाज की गैरराजनैतिक जड़ो को मजबूत करने की दिशा में सतत कार्य करने वाली संस्था, ट्रस्ट प्रबुद्ध फाउंडेशन के तत्वाधान में रंगकर्मी रंग निर्देशक के आंशिक आत्मकथा पर आधारित लिखित अभिनीत निर्देशित नाटक बेटी और नागपुर महाराष्ट्र की बहुजन महिला साहित्यकार डा. सुशीला टाकभौंरे द्वारा लिखित नाटक जीवन के रंग की प्रस्तुति आगामी दिनांक 08 सितम्बर 2025 को अपराह्न 05 बजे से उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र (एनसीजेडसीसी) के प्रेक्षागृह में किया जायेगा।

नाट्य प्रस्तुति में एक ओर जहां बहुजन समाज के सेवारत एवं सेवानिवृत्त अधिकारियों कर्मचारियों की दिव्य उपस्थिति से कार्यक्रम की शोभा बढ़ेगी तो दूसरी ओर उक्त दोनों नाट्य प्रस्तुतियों से बहुजन समाज की ग़ैर राजनैतिक जड़ों का सांस्कृतिक मार्ग सशक्त और प्रशस्त होगा।

AT Samachar
Author: AT Samachar

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