मननपुर, चानन, लखीसराय, बिहार। विश्व युवा कौशल दिवस पर पर्यावरण भारती द्वारा फलदार वृक्ष जामून का पौधारोपण हुआ। पौधारोपण का नेतृत्व शक्ति कुमार महतों ने किया। सहयोग हिमालय ने किया। पर्यावरण भारती के संस्थापक,पर्यावरण संरक्षण गतिविधि के प्रांत संयोजक तथा अखिल भारतीय पेड़ उपक्रम टोली सदस्य राम बिलास शाण्डिल्य ने कहा कि भारत में प्राचीन काल से ही परंपरा थी कि यदि ” एक हरा पेड़ काटा जाता था तो बदले में 10 नये पेड़ लगाये जाते थे। ” जितना प्रकृति से लेते थे, उससे अधिक वापस करते थे। परिणामस्वरूप प्राचीन काल में ग्लोबल वार्मिंग, बादल फटना जैसी प्राकृतिक आपदायें नहीं थीं।
सम्राट अशोक ने बंगाल से काशी को जोड़ने के लिए ग्रैंड ट्रंक रोड बनवाये, दोनों ओर घने पेड़ लगाये। पर्यावरण संरक्षण का भाव प्राचीन काल से भारत में था। 1935 ई में यूरोप में औद्योगिक क्रांति हुई। इसके पहले भारत में चीनी मील एक भी नहीं था। गन्ना से गूड़ बनाया जाता था। उस समय प्रदूषण नहीं था। औद्योगिक क्रांति के बाद ही वायु प्रदूषण संसार में हुआ। उपभोक्तावाद से मानव की आवश्यकतायें भी बढ़ी। इससे पर्यावरण असंतुलित हुआ। 1987 ई में पहली बार 165 देशों के पर्यावरणविद नार्वे में इकट्ठा हुए। विज्ञान के युग में विकास की प्रक्रिया पर चिन्तन हुआ। निर्णय किया गया कि आवश्यकतानुसार दुनिया के मानव उपभोग करें।
भारत में कृषि और ऋषि की परंपरा थी। देश में पेड़,पहाड़, नदी, सूर्य,चन्द्र,पशु-पक्षी, सर्प की पूजा होता रहा। जीयो और जीने का सिद्धांत था। कृषि में पशुपालन सहयोगी था। रासायनिक खाद नगण्य उपयोग होता था। केवल गोबर खाद का उपयोग कृषि में होता था। परिणामस्वरूप कैंसर, डायबीटीज जैसे रोग भारत में नहीं थे। इसलिए हमें पुन: प्रकृति की ओर लौटना होगा।
पर्यावरणविद दिनेश गुप्ता ने बताया कि विश्व युवा कौशल दिवस पहली बार संसार में 15 जुलाई 2015 ई को मनाया गया। संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 18 दिसंबर 2014 को ही विश्व युवा कौशल दिवस मनाने का निर्णय लिये थे।
विश्व युवा कौशल दिवस का उद्देश्य है –” वैश्विक स्तर पर युवाओं को रोजगार, बेहतर कार्य,उद्यमिता के लिए आवश्यक कौशल प्रदान करने के बारे में जागरूकता बढ़ाना है। ”
2026 का थीम है–“साझा भविष्य के लिए कौशल ( Skills for a shared Future) निर्धारित किया गया है “।
युवाओं को देश का सबसे बड़ा ताकत माना गया है। अतः युवाओं के पास डिजिटल, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), हरित (Green) तकनीक, सामाजिक, भावनात्मक एवं कौशल के साथ साथ संवाद, नेतृत्व,रचनात्मक सोच, सहयोग जैसे मानवीय गुण भी होने चाहिए। इसी उद्देश्य हेतु प्रति वर्ष 15 जुलाई को विश्व युवा कौशल दिवस मनाया जाता है। ऐसे सुअवसर पर पौधारोपण महत्वपूर्ण कार्य है।
पर्यावरण भारती के पौधारोपण कार्यक्रम में श्रीमती सरिता शंकर, माधव दास, रणजीत महतों, शक्ति कुमार महतों,मधव दास, दिनेश गुप्ता, राम बिलास शाण्डिल्य, योगेन्द्र साह, मतलू , हिमालय झा इत्यादि ने भाग लिये।










