ATS रिपोर्टर देवेन्द्र कुमार जैन भोपाल मध्यप्रदेश
मध्यप्रदेश में टोल व्यवस्था को अधिक आधुनिक, सुगम और निर्बाध बनाने की दिशा में मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम द्वारा एक महत्वपूर्ण नवाचार की शुरुआत की गई है। भोपाल–देवास मार्ग के फंदा टोल प्लाजा पर प्रदेश में पहली बार बैरियर-लेस टोलिंग सिस्टम (SLFF) का पायलट परीक्षण शुरू किया गया है। इस व्यवस्था में वाहनों को टोल प्लाजा पर रुकने की आवश्यकता नहीं होगी और पारंपरिक बूम बैरियर के कारण होने वाली अनावश्यक ब्रेकिंग एवं समय की बर्बादी से भी यात्रियों को राहत मिलेगी। मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम के अधिकारियों ने इस नवाचार और इसके क्रियान्वयन की पूरी प्रक्रिया का लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह के समक्ष प्रस्तुतीकरण किया। प्रस्तुतीकरण के बाद अधिकारियों को निर्देश दिए कि इस व्यवस्था को प्राथमिकता के आधार पर निर्धारित समय-सीमा में लागू किया जाए। उन्होंने यह भी निर्देशित किया कि पायलट परीक्षण के दौरान प्राप्त परिणामों का विधिवत मूल्यांकन किया जाए और इसके आधार पर इसे प्रदेश में वृहद स्तर पर लागू करने की कार्ययोजना तैयार की जाए। जनता की सुविधा की दृष्टि से यह एक उपयोगी पहल है। वर्तमान व्यवस्था में टोल प्लाजा पर वाहनों को बैरियर के कारण रुकना पड़ता है, जिससे कई बार वाहनों की कतार और अनावश्यक यातायात दबाव की स्थिति बनती है। नई व्यवस्था में वाहन बिना रुके टोल प्लाजा से गुजर सकेंगे। इससे यात्रियों के समय और ईंधन की बचत होगी तथा टोल प्लाजा पर लगने वाली अनावश्यक भीड़ को कम करने में मदद मिलेगी। नई तकनीक में चलते हुए वाहन की स्वतः पहचान, वर्गीकरण और फास्टेग के विवरण के आधार पर टोल राशि का संग्रह किया जाएगा। वाहन लगभग 100 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से गुजरते हुए भी टोल प्लाजा को पार कर सकेगा। इससे बूम बैरियर के कारण होने वाली ब्रेकिंग और समय की बर्बादी समाप्त होगी। SLFF लेन में फास्टेग/RFID रीडर, हाई-रिजॉल्यूशन ANPR कैमरे, वाहन डिटेक्शन एवं क्लासिफिकेशन सेंसर, लेन कंट्रोलर तथा ट्रांजैक्शन प्रोसेसिंग सिस्टम लगाए गए हैं। वाहन के लेन से गुजरते ही सिस्टम फास्टेग को स्वतः रीड कर वाहन की पहचान करता है, वाहन की श्रेणी के अनुसार टोल राशि की गणना करता है और फास्टेग खाते से राशि काटने की प्रक्रिया पूरी करता है। नई व्यवस्था में फास्टेग से संबंधित तकनीकी समस्याओं के समाधान की व्यवस्था भी की गई है। यदि फास्टेग में पर्याप्त बैलेंस नहीं है, वाहन का पंजीकरण नंबर गलत दर्ज है अथवा किसी अन्य तकनीकी कारण से टोल राशि तत्काल प्राप्त नहीं हो पाती है, तो संबंधित वाहन को ई-चालान के माध्यम से टोल राशि की सूचना दी जाएगी। निर्धारित तीन दिवस में राशि जमा नहीं करने पर नियमानुसार पेनल्टी सहित वसूली की प्रक्रिया अपनाई जाएगी । वर्तमान में फंदा टोल प्लाजा की एक लेन में इस व्यवस्था का पायलट परीक्षण किया जा रहा है। परीक्षण के परिणामों का विधिवत मूल्यांकन करने के बाद सफल पाए जाने पर 1 जनवरी 2027 से भोपाल–देवास मार्ग के तीनों टोल प्लाजा की सभी लेनों में इसे लागू करने की योजना है। निर्देश दिये कि पायलट प्रोजेक्ट के परिणामों के आधार पर इस तकनीक की उपयोगिता, कार्यक्षमता और यात्रियों को मिलने वाली सुविधा का आकलन किया जाए। इसके बाद प्रदेश के अन्य उपयुक्त टोल प्लाजा पर भी बैरियर-लेस टोलिंग लागू करने की विस्तृत कार्ययोजना तैयार की जाए।









