89 वर्ष की आयु में ली अंतिम सांस, मणिकर्णिकाघाट पर अंतिम संस्कार
वराणसी। “खेलें मसाने में होरी दिगंबर…” पं. छन्नूलाल मिश्र के स्वर में अमर यह गीत शुक्रवार को सच हो गया, जब उन्हें मां गंगा के तट पर काशी के मणिकर्णिकाघाट पर चिता की भस्म बनाकर दिगंबर शिव की होली में विलीन कर दिया गया। गुरुवार की भोर में दशहरा के पावन दिन 89 वर्ष की आयु में उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके पौत्र राहुल मिश्र ने मुखाग्नि दी। जब पुलिस बैंड ने उनके प्रिय गीत को अंतिम विदाई में बजाया तो घाट पर हर व्यक्ति भावुक हो उठा। पं. मिश्र का निधन मीरजापुर स्थित उनकी छोटी बेटी नम्रप्ता मिश्र के घर हुआ। उनका पार्थिव शरीर औरंगाबाद स्थित आवास पर दर्शनार्थ रखा गया.. देर रात अंतिम यात्रा निकली और मणिकर्णिका घाट तकं पहुंची तो पूरा शहर उनके सुरों की स्मृतियों में डूब गया. “बरसन लागी बदरिया…” और.” जैसे गीतों की गूंज मानो वातावरण में तैर रही थी।

पं मिश्र केवल गायक नहीं, काशी की जीवंत्त आत्मा थे: मोदी
राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री ने जताया शोक पं. मिश्र के निधन पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गहरा शोक व्यक्त किया। प्रधानमंत्री मोदी ने उन्हें याद करते हुए कहा कि पं. मिश्र केवल गायक नहीं, बल्कि काशी की जीवंत आत्मा थे, जिन्होंने अपनी साधना से भारतीय संगीत को विश्व में पहचान दिलाई। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि पं. मिश्र का निधन संगीत जगत के लिए अपूरणीय क्षति है।










