वैज्ञानिकों ने विकसित की ऐसी किडनी जो किसी भी रक्त समूह वाले व्यक्ति में प्रत्यारोपित कि जा सकेगी।

वैज्ञानिकों ने विकसित की ऐसी किडनी जो किसी भी रक्त समूह वाले व्यक्ति में प्रत्यारोपित कि जा सकेगी।

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 देवेन्द्र कुमार जैन की रिपोर्ट

भोपाल मध्य प्रदेश। वैज्ञानिकों ने विकसित की ऐसी किडनी जो किसी भी रक्त समूह वाले व्यक्ति में प्रत्यारोपित कि जा सकेगी। वैज्ञानिकों ने हाल ही में चिकित्सा विज्ञान में एक ऐतिहासिक सफलता हासिल की है। उन्होंने ऐसी किडनी विकसित की है जिसे किसी भी रक्त समूह वाले व्यक्ति में प्रत्यारोपित किया जा सकता है। पहले यह आवश्यक था कि दाता और प्राप्तकर्ता का ब्लड ग्रुप एक जैसा हो, वरना शरीर उस अंग को अस्वीकार कर देता था। लेकिन अब इस नई तकनीक ने इस बाधा को तोड़ दिया है।

इस प्रक्रिया में वैज्ञानिकों ने विशेष एंज़ाइमों की मदद से किडनी की सतह से उन अणुओं को हटा दिया जो रक्त समूह की पहचान कराते हैं। इसके बाद यह किडनी किसी भी ब्लड ग्रुप के व्यक्ति के साथ संगत हो जाती है। इस प्रयोग के शुरुआती परिणाम बेहद सफल रहे हैं और यह तकनीक भविष्य में लाखों मरीजों के लिए जीवनदायी साबित हो सकती है। अब अंग प्रत्यारोपण के लिए ब्लड ग्रुप का इंतज़ार खत्म हो सकता है, जिससे अनगिनत जानें बचाई जा सकेंगी। यह खोज न केवल चिकित्सा क्षेत्र की सीमाएँ बदल रही है बल्कि यह इस बात का प्रमाण भी है कि विज्ञान मानवता के लिए सबसे शक्तिशाली उपचार है।

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