कल होगा कवि सम्मेलन
त्रिभुवन नाथ शर्मा की रिपोर्ट
प्रयागराज। शिल्प मेले में भक्ति गीतों से श्रोता मंत्रमुग्ध, सिद्धी लोकनृत्य ने दर्शकों में भरा रोमांच। ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ के अंतर्गत आयोजित दस दिवसीय राष्ट्रीय शिल्प मेला कला, संस्कृति और हुनर के संगम के रूप में उभर रहा है। सोमवार को मेले की आठवीं सांस्कृतिक संध्या में कलाकारों की प्रस्तुतियों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। पूरे मेला परिसर में देश के कोने-कोने से आए शिल्पकार अपनी बेहतरीन हस्तशिल्प कलाकृतियों, कपड़ों और पारंपरिक उत्पादों का प्रदर्शन कर रहे हैं, जो शहरवासियों के लिए खरीददारी का एक बड़ा आकर्षण बने हुए हैं।
सांस्कृतिक संध्या का शुभारंभ मुख्य अतिथि प्रोफेसर संजय सिंह (आईआईटी, प्रयागराज), व्यापार मंडल के अध्यक्ष नीरज जायसवाल, और महिला प्रकोष्ठ अध्यक्ष स्वाती निरखी ने दीप प्रज्वलित कर किया। केंद्र निदेशक सुदेश शर्मा द्वारा विशिष्ट अतिथि नरेन्द्र सिंह (से.नि. लेखाधिकारी, एनसीजेडसीसी) एवं लल्लन यादव को अंग वस्त्र, स्मृति चिन्ह व पौधा देकर सम्मानित किया गया।
भजनों और लोकनृत्यों की शानदार प्रस्तुति
कार्यक्रम की शुरुआत भजन गायक कमलेश पाठक के भजनों से हुई। उन्होंने “राम चरन सुखदायी” और स्थानीय बोली में “संगम पै छाय रहब छानी पियब रोज गंगा कै पानी” जैसे भजन गाकर भक्ति का माहौल बनाया। इसके बाद अनुराधा श्रीवास्तव ने संस्कार गीतों और मणिमाला सिंह ने “नगर आयोध्या बहुत नीक लागी” जैसे भजनों से पंडाल को भक्ति से सराबोर कर दिया। लोकनृत्यों की कड़ी में, नितिन दवे एवं साथी कलाकारों ने गुजरात का प्रसिद्ध टीपानी और ऊर्जा से भरपूर डांडिया रास नृत्य प्रस्तुत किया। वहीं, रामकृष्ण रजक ने हिमाचल का पारंपरिक कांगड़ा नृत्य और शब्बीर सिद्धी एवं उनके दल ने उत्साहपूर्ण सिद्धी धमाल नृत्य प्रस्तुत कर खूब वाहवाही लूटी। युसूफ खान ने अपने विशेष अंदाज में भपंग वादन की प्रस्तुति दी। कार्यक्रम का संचालन डॉ. आकांक्षा पाल ने किया।
कल कवि सम्मेलन और मुशायरा
मेला के नौवें दिन, मंगलवार को शाम 05 बजे से एक भव्य कवि सम्मेलन एवं मुशायरा आयोजित होगा। इसमें देश के चर्चित कवि गजेंद्र सोलंकी, अजहर इकबाल, सैयद फजले रजा, ताजवर सुल्ताना, नजीब इलाहाबादी, अशोक बेशर्म, शैलेन्द्र मधुर, और श्लेष गौतम अपनी ओजपूर्ण और हास्य कविताओं से श्रोताओं को आनंदित करेंगे।










