प्रयागराज। स्वामी हरिहरानंद सरस्वती बने थावे विद्यापीठ के कुलाधिपति। थावे विद्यापीठ के विशेष अधिवेशन प्रयागराज के स्वामी भजनानंद मृत्युंजय सेवा धाम, झूसी में संपन्न हुआ। जिसमें विद्यापीठ के विद्वत परिषद एवं समस्त पदाधिकारियों ने एकमत से महामंडलेश्वर श्री स्वामी हरिहरानंद सरस्वती – परमाध्यक्ष देवी संपद मंडल को थावे विद्यापीठ का कुलाधिपति बनाने की अधिसूचना जारी की।

कला, साहित्य और संस्कृति के उन्नयन और विकास के क्षेत्र में कार्य करने वाले थावे विद्यापीठ, गोपालगंज, बिहार की एक दिनी विशेष अधिवेशन 22 फरवरी 2026 को प्रयागराज धाम के संगम तट पर स्थित स्वामी भजनानंद मृत्युंजय सेवा धाम, झूसी के स्वामी भजनानंद मंडपम, भव्य सभागार में संपन्न हुआ। जिसमें विद्यापीठ के समस्त पदाधिकारी, विद्वत परिषद एवं सामान्य परिषद की बैठक में महामंडलेश्वर श्री स्वामी हरिहरानंद सरस्वती जी महाराज, जो देवी संपद मंडल के परमाध्यक्ष भी हैं, के नाम का प्रस्ताव थावे विद्यापीठ के उप कुलसचिव डॉ गिरधारी लाल अग्रवाल ने रखा। जिस पर कुलपति डॉ विनय कुमार पाठक, प्रतिकूलपति डॉक्टर जंग बहादुर पांडे, कुलसचिव डॉक्टर पीएस दयालयति ने अपनी सहमति प्रकट की। इस अनुशंसा के बाद स्वामी हरिहरानंद सरस्वती के नाम की थावे विद्यापीठ के कुलाधिपति के रूप में अधिसूचना जारी कर नियुक्ति कर दी गई। जिसका उपस्थित जन समुदाय ने करतल ध्वनि स्वागत किया।इसके साथ ही प्रतिकूलपति डॉक्टर जंग बहादुर पांडे, जिनका कार्यकाल आज पूरा हो रहा था, उनको पुनः प्रतिकूलपति के पद पर ही चयनित किया गया।
नवनियुक्त कुलाधिपति डॉ हरिहरानंद सरस्वती ने अपने उद्बोधन में कहा कि वे थावे विद्यापीठ के उत्कर्ष में मनसा वाचा कर्मणा संलग्न हो कर सबके साथ मिलकर कार्य करेंगे। शिक्षा के क्षेत्र में विद्यापीठ के माध्यम से सेवा का एक सुअवसर प्राप्त हुआ है हम सबको इसका लाभ उठाना चाहिए। कुलपति डॉ विनय कुमार पाठक ने कुलाधिपति बनने पर उन्हें हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं दीं। विद्यापीठ परिवार और उपस्थित जन समुदाय ने तालियों की गड़गड़ाहट से प्रसन्नता व्यक्त की।

इस शुभ अवसर पर हरिहरनाथ क्षेत्र के उदासीन स्वामी श्री विष्णु दास जी महाराज (मोनी बाबा) भी विशेष रूप से उपस्थित रहे। ये तपस्वी सिद्ध संत हैं और केवल टाट अथवा बोरा का ही वस्त्र के रूप में उपयोग करते हैं। इनके साथ ही जगतगुरु श्री दिलीप योगीराज जी महाराज भी उपस्थित रहे। राष्ट्र के अनेक प्रांतो से आए साहित्यकार, कवि, लेखक, विद्वतजन भी इस पुनीत कार्यक्रम में सम्मिलित हुए।
थावे विद्यापीठ का दीक्षांत समारोह
दोपहर में भोजनावकाश के पश्चात थावे विद्यापीठ का गरिमामय दीक्षांत समारोह प्रारंभ हुआ। जिसमें देश-विदेश के अनेक साहित्यकार, विद्वान पुरुष, कवि, लेखक आदि को विद्या वाचसपति एवं विद्यासागर की मानद उपाधि प्रदान की गई। साथ ही कुछ समाजसेवियों का भी सम्मान थावे विद्यापीठ की ओर से किया गया। सभी विद्वान प्रतिभागियों को विद्यापीठ के कुलाधिपति डा स्वामी हरिहरानंद सरस्वती, कुलपति डॉ विनय कुमार पाठक, प्रतिकूलपति डॉक्टर जंग बहादुर पांडे, कुलसचिव डॉ पीएस दयालयती, उप कुलसचिव डॉ गिरधारी लाल अग्रवाल ने इन सभी को सम्मानोपाधि में प्रमाणपत्र और मोमेंटो प्रदान किया गया। इस अवसर पर स्वामी भजनानंद मृत्युंजय सेवा धाम झूसी के व्यवस्थापक जगदीश शरण त्रिपाठी, सुखदेव दुबे, मनीष कपूर और विष्णु अग्रवाल को विद्यापीठ की ओर से मोमेंटो प्रदान किया गया।
फूलों की होली
थावे विद्यापीठ के डा गिरधारी लाल अग्रवाल ने बताया कि इस बैठक के पश्चात सभी संतो और थावे विद्यापीठ परिवार ने मिलकर फूलों की होली खेल कर सनातन संस्कृति और भारतीय रीति रिवाज के प्रति अपनी भावना प्रदर्शित की। होली के लोकगीत संगीत के मध्य अतिआनंद और उत्साह के साथ फूलों की होली का आनंद सभी ने उठाया। फूलों की माला और खुले फूलों से तथा सुमधुर संगीत के साथ नचाते गाते सभी लोग आनंदित होते रहे। इसी बीच ऋतु के अनुकूल वसंत कव्योत्सव का आयोजन भी किया गया। जिसमें अनेक कवियों ने अपने कविताओं से दर्शक दीर्घा को गुदगुदाया।










