त्रिभुवन नाथ शर्मा की रिपोर्ट
प्रयागराज। “लागल गंगा जी का मेला छोड़ा घरवा का झमेला” ने श्रोताओं को किया मंत्रमुग्ध लोगों को लुभा रहा है शिल्प मेला। उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र, संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा आयोजित “चलो मन गंगा–यमुना तीर” के अंतर्गत बुधवार को संगोष्ठी एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। संगोष्ठी में मुख्य वक्ता डॉ. चितरंजन कुमार (सहायक आचार्य, इला. विश्वविद्यालय) ने कहा कि गंगा केवल नदी नहीं, बल्कि भारत की सबसे विराट स्त्री और राष्ट्र का प्राण है। उन्होंने कहा कि मां संतान के लिए हर रूप में ढल जाती है। किसी ने गंगा जल का उपयोग नमाज़ से पूर्व वज़ू के लिए किया तो किसी ने अंतिम संस्कार के लिए। गंगा सबके काम आई, लेकिन आज की मतलबी संतान ने उसे अकेला और निरीह छोड़ दिया है।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सरस्वती पत्रिका के संपादक अनुपम परिहार ने कहा कि तीर्थराज प्रयाग भारतीय सांस्कृतिक चेतना का मूल स्रोत रहा है। यह केवल आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि भारतीय भाषाओं के साहित्य में विकसित आध्यात्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक चिंतन का साझा मंच है। वेद–पुराणों में प्रयाग को मोक्षदायिनी भूमि के रूप में वर्णित किया गया है, वहीं हिंदी साहित्य में यह भक्ति और लोकमंगल का केंद्र रहा है।
इसके बाद आयोजित सांस्कृतिक संध्या में कलाकारों ने एक से बढ़कर एक प्रस्तुतियाँ देकर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। सूर्यकांत ने “माघ मकर गए आई चला हो त्रिवेणी नहाई” लागल गंगा जी का मेला छोड़ा घरवा का झमेला, ले ले आयिहा बालम बजरिया से चुनरी सहित कई लोकगीत प्रस्तुत किए। निर्गुण गायक सूर्य प्रकाश पटेल ने गंगा और प्रयागराज की महिमा से जुड़े गीत पिंजरवा के छोडि जइहै सुगना सतगुरु से, गंगा के निर्मल बा पानी नहाई चले दोनो परानी व प्रयागराज नगरी मुक्ति के धाम है की प्रस्तुति देकर खूब तालियाँ बटोरीं। वहीं विजय चंद्रा ने सिंथेसाइज़र वादन से कार्यक्रम को नई ऊँचाई दी।
कार्यक्रम की कड़ी में आयोजित नृत्य प्रतियोगिता में 12 प्रतिभागियों ने सहभागिता कर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। जबावी बिरहा के अंतर्गत बृजभान यादव, बरम दीन यादव, मुंशी लाल सोनकर, कमल चंद्र यादव, अभय राज यादव एवं आकांक्षा भारती ने लोकगीत बिरहा प्रस्तुत किया। गायन प्रतियोगिता में निर्णायक मंडल के रूप में कथक प्रशिक्षका उर्मिला शर्मा एवं कृति श्रीवास्तव मौजूद रहीं। नृत्य प्रतिभागियों को कार्यक्रम सलाहकार कल्पना सहाय द्वारा प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. पीयूष मिश्रा ने किया।










