जल्दी बांटो उसर परती जिनके पास नहीं है धरती
त्रिभुवन नाथ शर्मा की रिपोर्ट
प्रयागराज। जो जमीन सरकारी है वो जमीन हमारी है। सरकारी जमीन का पट्टा करो वरना कुर्सी खाली करो। धरती नहीं धनवानो की, है मजदूर किसानों की। जल्दी बांटो उसर परती, जिनके पास नहीं है धरती। धन धरती अब बटके रहेगी भूखी जनता चुप न रहेगी आदि श्लोगन के साथ डा. अम्बेडकर वेलफेयर नेटवर्क (डान) के संस्थापक उच्च न्यायालय के अधिवक्ता आईपी रामबृज सतत यमुनानगर की तहसील बारा और करछना तथा सिविल लाइन स्थित धरना स्थल पर प्रदर्शन करके मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश शासन लखनऊ को संबोधित ज्ञापन उप जिलाधिकारी और जिलाधिकारी प्रयागराज के नाम सौंपकर भेजने का कार्य सतत 2007 से करते रहे चले आ रहे है।
डान संस्थापक उच्च न्यायालय के अधिवक्ता आईपी रामबृज का कहना है कि यमुनापार की तहसील बारा व करछना में सन सत्तर और अस्सी के दौरान चकबंदी आई थी। चकबंदी के समय प्रत्येक ग्रामसभा में कम से कम पचास और अधिकतम सौ बीघा के करीब ग्रामसमाज की जमीनें बंजार, परती, उसर और कहीं-कहीं पर सीलिंग की जमीने निकल कर आई किंतु दुर्भाग्य रहा कि तत्समय अनुसूचित जाति के भूमिहीन खेतिहर मजदूर निरक्षर और अनपढ़ थे, प्रशासनिक स्तर पर तहसील लेवल के कागजातों का कोई लेखा-जोखा उन्हें मालूम नहीं था जिसके चलते उच्च वर्गों के भूमिधरी जमीनों से जो अतिरिक्त जमीने निकल कर आई, चकबंदी के दस पन्द्रह दिन बाद उच्च वर्ग के लोग सरकारी जमीनों को पुनः अपनी भूमिहारी जमीन में मिलकर आज भी जोत बो रहे हैं।
आईपी रामबृज का कहना है कि डान की लड़ाई क्षेत्रीय स्तर पर किसी भी वर्ग जाति समुदाय से नहीं है बल्कि डा. अम्बेडकर वेलफेयर नेटवर्क (डान) का संघर्ष प्रदेश के मुख्यमंत्री और देश के प्रधानमंत्री से है क्योंकि प्रदेश के मुख्यमंत्री और देश के प्रधानमंत्री किसी एक जाति वर्ग विशेष के मुख्यमंत्री व प्रधानमंत्री नहीं होते है बल्कि वो प्रदेश और देश के प्रत्येक नागरिकों के मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री हैं। भाजपा सरकार एक ओर जहां सबका साथ सबका विकास की बात करती है वहीं आज आजादी के अठहत्तर साल बाद प्रयागराज के यमुनापार की तहसील बारा, करछना, मेंजा और कोराव में देखा जाए तो अनुसूचित जाति के लोग आज भी मुख्य विकास की धारा से कोशो दूर है। प्रदेश के मुख्यमंत्री और देश के प्रधानमंत्री से डान यह मांग करता है कि धान की कटाई के तुरंत बाद प्रत्येक ग्रामसभा में अभियान चलाकर कब्जा की गई बंजर, परती, उसर और सीलिंग की जमीने जिसे क्षेत्रीय जमीदारों व क्षेत्रीय भूमाफिया द्वारा कब्जा किया गया है उनसे मुक्त कराकर अनुसूचित जाति के भूमिहीन खेतिहर मजदूरों में जिनके पास घर नहीं है उनको आवासीय पट्टा व जिनके पास खेती बारी की जमीने नहीं है उनमें कृषि कार्य का पट्टा किया जाए अन्यथा की स्थिति में संविधान दिवस 26 नवंबर 1949 की 76 वीं वर्षगांठ पर यमुनापार से कम से कम दस हजार लोग अपने घरों से निकलकर मुख्यमंत्री आवास पांच कालिदास मार्ग लखनऊ पहुंचकर अनिश्चितकालीन अनशन पर बैठने के लिए बाध्य होंगे।










